चारधाम यात्रा मार्ग पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट-डीएम स्वाति भदौरिया ने चलाया सख्त अभियान

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल में बच्चों की सुरक्षा,महिला कल्याण और सामाजिक संरक्षण योजनाओं को लेकर जिला प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ सक्रिय नजर आ रहा है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में आयोजित जिला बाल कल्याण समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में चारधाम यात्रा मार्गों पर बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेष रेस्क्यू एवं पुनर्वास अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल औपचारिक कार्रवाई करना नहीं,बल्कि धरातल पर वास्तविक परिवर्तन लाना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कोई भी बच्चा बाल श्रम,भीख मांगने अथवा असुरक्षित परिस्थितियों में नजर नहीं आना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर ऐसे बच्चों की पहचान करें और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएं। चारधाम यात्रा सीजन के दौरान बढ़ती आवाजाही को देखते हुए डीएम ने यात्रा मार्गों,बस अड्डों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाल तस्करी,बाल श्रम और असहाय बच्चों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी क्रम में कोटद्वार बस स्टेशन पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एक्सटेंशन निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए,ताकि जरूरतमंद बच्चों को त्वरित सहायता मिल सके। बैठक में परिवीक्षा विभाग की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से प्राप्त सभी मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जा चुका है। जनवरी से मार्च 2026 तक बाल देखरेख संस्थाओं में पंजीकृत मामलों,स्पॉन्सरशिप योजनाओं तथा विद्यालयों और महाविद्यालयों में संचालित जागरूकता कार्यक्रमों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बाल अधिकारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए बीडीसी बैठकों,जनसुनवाई शिविरों और बहुद्देशीय कैंपों में परिवीक्षा विभाग के स्टॉल एवं हेल्प डेस्क लगाने के प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समाज के अंतिम छोर तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए,ताकि जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के भविष्य को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। डीएम ने निर्देश दिए कि ऐसे बच्चों को विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से रोजगारपरक और कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए,जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर भी जिलाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि जरूरतमंद बच्चों को समयबद्ध मनोवैज्ञानिक परामर्श और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। विशेष रूप से पॉक्सो पीड़ित बालिकाओं को आर्थिक सहायता में किसी भी प्रकार की देरी न हो,इसके लिए तत्काल प्रभाव से प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक सरकारी मदों से सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। महिला कल्याण योजनाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने विधवा महिलाओं की लंबित पेंशन (एरियर) शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों तक सहायता समय पर पहुंचना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही करने वाले अधिकारियों के प्रति सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के अध्यक्ष राकेश चंद्र,जिला शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) अंशुल बिष्ट,जिला खेल अधिकारी जयबीर रावत सहित समिति के सदस्य,संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
