श्रीकोट गंगानाली सहकारी समिति की बोर्ड बैठक में विकास और आर्थिक मजबूती पर मंथन,वर्ष 2026-27 के लिए 3 करोड़ की मांग

श्रीनगर गढ़वाल। बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति लिमिटेड श्रीकोट गंगनाली की संचालक मंडल बैठक गुरुवार को समिति कार्यालय, हनुमान मंदिर के निकट श्रीनगर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष अर्जुन सिंह रावत ने की। बैठक में समिति के विकास,आर्थिक सुदृढ़ीकरण और आगामी योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वर्ष 2025-26 की वार्षिक सामान्य निकाय बैठक से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया तथा आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 3 करोड़ रुपये की मांग प्रस्तावित की गई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि यह धनराशि समिति के विस्तार, कृषकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और सहकारिता गतिविधियों को मजबूती देने के लिए आवश्यक है। बैठक के दौरान पिछली कार्यवाही की पुष्टि पर भी विचार किया गया। समिति सचिव द्वारा पूर्व बैठक की कार्यवाही पढ़कर सुनाई गई,जिसे सर्वसम्मति से अनुमोदित कर दिया गया। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत से समय लेकर बोर्ड की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी,जिसमें समिति के विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। समिति अध्यक्ष अर्जुन सिंह रावत ने कहा कि सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि समिति को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी सदस्यों और कृषकों का सहयोग आवश्यक है। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने समिति की प्रगति,पारदर्शिता और जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही कृषकों से अपील की गई कि वे समिति की वार्षिक बैठकों में अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग कर अपने सुझाव दें,ताकि समिति को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से और अधिक सशक्त बनाया जा सके। बैठक में उपाध्यक्ष दिगम्बर सिंह,सदस्य अर्जुन सिंह,सुनीता रावत,हीरा देवी,अनिता कण्डारी,अनिल कुमार,कुशलानाथ,निर्वाचक मनोनीत सदस्य दुर्गा नौटियाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर समिति सचिव शशांक बहुगुणा ने बैठक की कार्यवाही संचालित करते हुए समिति की वर्तमान स्थिति,योजनाओं और आगामी प्रस्तावों की जानकारी दी। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई,जिसमें समिति को नई दिशा देने और कृषकों के हितों को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
