सेब की खुशबू से महका सीमांत गांव जमरिया-दो किसानों ने पहाड़ में आत्मनिर्भरता का रचा नया इतिहास

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। कभी पलायन,सीमित कृषि और रोजगार की कमी से जूझने वाले पहाड़ के गांव अब आधुनिक बागवानी के दम पर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। यदि इच्छाशक्ति,आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ एक साथ मिल जाए तो पर्वतीय खेती भी लाखों की आय का मजबूत माध्यम बन सकती है। इसका जीवंत उदाहरण पौड़ी जनपद के बीरोंखाल विकासखंड का सीमांत गांव जमरिया है,जहां दो प्रगतिशील किसानों ने सेब बागवानी को अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली है,बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में कृषि एवं उद्यान क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आधुनिक बागवानी,वैज्ञानिक खेती और विभागीय सहयोग के बल पर जमरिया गांव के किसान सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी आज सफलता की ऐसी मिसाल बन चुके हैं,जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में आधुनिक सेब बागवानी की शुरुआत की। शुरुआत में सीमित स्तर पर लगाए गए पौधे आज एक विशाल फलोद्यान का रूप ले चुके हैं। उनके बगीचे में लगभग 1500 फलदार सेब के पौधे हैं और लगभग 80 नाली भूमि पर सेब के साथ-साथ अन्य फलदार वृक्ष एवं मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है। आधुनिक कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से वे प्रतिवर्ष चार से पांच लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं। उद्यान विभाग की योजनाओं के अंतर्गत उन्हें ट्रैक्टर,पॉलीहाउस,तकनीकी मार्गदर्शन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हुईं,जिससे खेती अधिक आधुनिक,वैज्ञानिक और लाभकारी बन सकी। उन्होंने अपनी आय को और मजबूत बनाने के लिए मत्स्य पालन एवं बकरी पालन को भी अपनाया है। इतना ही नहीं,उनके कृषि कार्यों से स्थानीय स्तर पर कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है,जिससे गांव की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इसी गांव के एक अन्य प्रगतिशील किसान मंगल सिंह चौधरी ने भी सेब बागवानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनके बगीचे में लगभग 1500 फलदार सेब के पौधे हैं,जबकि भविष्य की तैयारियों के तहत 500 नए पौधे भी तैयार किए जा चुके हैं। आधुनिक तकनीकों,बेहतर प्रबंधन और विभागीय प्रशिक्षण के बल पर वे भी प्रतिवर्ष चार से पांच लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं। मंगल सिंह चौधरी नियमित रूप से कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और वहां प्राप्त नई जानकारियों को अन्य किसानों तक भी पहुंचाते हैं। उनके बगीचे में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले सेब और अन्य कृषि उत्पाद प्रदेश की विभिन्न मंडियों तक पहुंच रहे हैं,जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। उनकी सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि पहाड़ की जलवायु और मेहनत यदि आधुनिक तकनीक से जुड़ जाए तो बागवानी आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है। जमरिया गांव के इन दोनों किसानों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन,वैज्ञानिक खेती,आधुनिक तकनीक और किसानों की अथक मेहनत मिलकर पर्वतीय कृषि की तस्वीर बदल सकती है। जो गांव कभी पलायन की चुनौती से जूझ रहे थे,वहीं अब आधुनिक बागवानी के माध्यम से रोजगार और समृद्धि के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं का खेती और बागवानी के प्रति रुझान भी बढ़ रहा है तथा गांवों में स्वरोजगार की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन सिंह भंडारी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उद्यान विभाग किसानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे,तकनीकी मार्गदर्शन,आधुनिक प्रशिक्षण तथा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीरोंखाल के जमरिया गांव के किसान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से बागवानी करें और विभागीय योजनाओं का पूरा लाभ लें तो पर्वतीय क्षेत्रों में भी सेब उत्पादन के माध्यम से लाखों रुपये की आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने युवाओं और किसानों से आधुनिक बागवानी अपनाकर आत्मनिर्भर बनने तथा सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया। आज जमरिया की यह सफलता केवल दो किसानों की उपलब्धि नहीं,बल्कि बदलते उत्तराखंड की उस नई तस्वीर का प्रतीक है,जहां पहाड़ की मिट्टी,किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाएं मिलकर समृद्धि का नया अध्याय लिख रही हैं।
