संस्कारों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रहा समलौण आंदोलन-कल्याबीर मंदिर के शिलान्यास पर विधायक विनोद कंडारी ने रोपा बेलपत्र

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। जब किसी धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता प्रकृति संरक्षण के संकल्प से जुड़ती है,तो वह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं रहता,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कार और संदेश बन जाता है। उत्तराखंड की लोकपरंपराओं और प्रकृति के बीच इसी आत्मीय रिश्ते को मजबूत करने की दिशा में समलौण आंदोलन लगातार जनजागरण का माध्यम बन रहा है। इसी भावना का जीवंत उदाहरण जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड कीर्तिनगर की पट्टी अकरी के ग्राम पैन्डुला में देखने को मिला। ग्राम पैन्डुला में कल्याबीर मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम के अवसर पर क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी ने बेलपत्र का समलौण पौधा रोपकर धार्मिक आयोजन को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जोड़ दिया। इस अवसर पर पौधारोपण के साथ ही उसके संरक्षण की जिम्मेदारी दीपक पोखरियाल ने ली। इस पहल ने यह संदेश दिया कि धार्मिक एवं सामाजिक संस्कारों की स्मृति को केवल पत्थरों और भवनों में नहीं,बल्कि जीवित वृक्षों के रूप में भी संजोया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगाईं ने कहा कि समलौण एक भावनात्मक आंदोलन है,जो हमारी रीति-रिवाजों,परंपराओं,संस्कृति और प्रकृति को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जन्म,विवाह,धार्मिक आयोजन,मंदिर निर्माण,पुण्यतिथि सहित विभिन्न संस्कारों एवं महत्वपूर्ण अवसरों पर समलौण पौधारोपण की परंपरा को बढ़ावा देना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल है। उन्होंने कहा कि आज दूषित होता पर्यावरण,लगातार घटता वन क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे समय में यदि प्रत्येक परिवार अपने सुख-दुख और संस्कारों को एक पौधे के साथ जोड़ दे,तो यह छोटी-सी पहल आने वाले वर्षों में बड़े पर्यावरणीय आंदोलन का रूप ले सकती है। सावित्री देवी ममगाईं ने क्षेत्रवासियों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक शुभ एवं महत्वपूर्ण संस्कार के अवसर पर समलौण पौधारोपण करें और केवल पौधा लगाने तक सीमित न रहें,बल्कि उसे वृक्ष बनने तक उसकी जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होंने कहा कि एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा,छाया,जल संरक्षण और हरियाली का उपहार है। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी ने समलौण पौधारोपण की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक संस्कार के अवसर पर पौधारोपण करना पुण्यकारी कार्य है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाली ऐसी पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है। विधायक ने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण के प्रति जागरूक होने तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि पहाड़ की संस्कृति सदियों से प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की रही है और समलौण जैसी पहल उसी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा,जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर वृक्ष का रूप लें। इसी उद्देश्य से बेलपत्र के पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी दीपक पोखरियाल द्वारा लेना पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी की मिसाल बना। समलौण आंदोलन का मूल संदेश भी यही है कि किसी विशेष अवसर पर लगाए गए पौधे को उस आयोजन की जीवंत स्मृति के रूप में संरक्षित किया जाए। समय के साथ जब वह पौधा बड़ा होकर वृक्ष बनेगा,तो वह उस धार्मिक आयोजन,परिवार और समाज की स्मृतियों को भी अपने साथ जीवित रखेगा। कल्याबीर मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर ग्रामीणों ने भी समलौण पौधारोपण की पहल की सराहना की और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। धार्मिक आयोजन में पौधारोपण को शामिल किए जाने से ग्रामीणों के बीच भी यह संदेश पहुंचा कि प्रकृति की सेवा किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि प्रत्येक व्यक्ति और परिवार का दायित्व है। कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष राकेश पोखरियाल,ग्रामीण संदीप पोखरियाल,परितोष पोखरियाल,आशुतोष पोखरियाल,कुंदन पोखरियाल,ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कल्याबीर मंदिर के शिलान्यास के साथ रोपा गया बेलपत्र का यह पौधा अब केवल एक पौधा नहीं,बल्कि धार्मिक आस्था,सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण की उस भावना का प्रतीक बन गया है,जिसमें संस्कार भी सुरक्षित रहें,संस्कृति भी जीवित रहे और प्रकृति भी हरी-भरी बनी रहे।
