Wednesday 09/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था0नि0) नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर पालिका परिषद किच्छा एवं नगर पालिका परिषद सिरौलीकला के अध्यक्ष व सदस्यों के निर्वाचन हेतु अधिसूचना जारी की गयी है।किच्छा एवं सिरौली कला में अलग-अलग नगर पालिका चुनाव की घोषणा पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्नशिक्षक दिवस पर साहित्यिक गरिमा के बीच कविराज नीरज नैथानी सम्मानित-शिक्षा और साहित्य में योगदान को मिला सम्मानश्रमिक अपने पसीने से प्रदेश के विकास की नई इबारत लिख रहे–सतपाल महाराजजनता मिलन में 19 शिकायतें दर्ज,अधिकांश का मौके पर निस्तारणविद्यालय सत्यापन अभियान में बीआर मॉडर्न स्कूल की आड़ में अवैध रूप से संचालित मिली महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमीसांसद भट्ट ने पंजाबी गौरव सम्मेलन की तैयारियों का लिया जायजाबाजपुर में भाजपा नेता व उसके समर्थकों द्वारा सरकारी विभाग के इंजीनियर को पीटने की घटना पर भाकपा(माले) ने आक्रोश व्यक्त करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।15वीं नेशनल वोविनाम चैंपियनशिप में उत्तराखंड शिरमौर, चैंपियन ट्रॉफी पर किया कब्जाचार माह से जारी आरक्षण आंदोलन के समर्थन में रुद्रपुर में महायज्ञ, 24 घंटे का धरना शुरू; 19 सितंबर से आमरण अनशन की चेतावनी
राज्य

प्रकृति से समरसता का संकल्प,630 स्थानों पर गूंजा हरित संदेश-संत निरंकारी मिशन लगाएगा 10 लाख पौधे


श्रीनगर गढ़वाल। धरती केवल हमारे उपयोग की वस्तु नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। जब आध्यात्मिक चेतना प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जुड़ती है,तो पौधारोपण महज एक कार्यक्रम नहीं रहता,बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन जाता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए संत निरंकारी मिशन पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर एक व्यापक हरित आंदोलन का स्वरूप दे रहा है। बाबा हरदेव सिंह का दिव्य संदेश-प्रदूषण अंदर हो या बाहर,दोनों ही हानिकारक हैं,आज भी मिशन की पर्यावरणीय गतिविधियों को दिशा प्रदान कर रहा है। इसी प्रेरणा और सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित के पावन आशीर्वाद से संत निरंकारी मिशन की पर्यावरण संरक्षण पहल वननेस वन-प्रकृति के साथ समरसता निरंतर विस्तार प्राप्त कर रही है। पौधारोपण से आगे बढ़कर प्रकृति से आत्मीय रिश्ता जोड़ने की पहल संत निरंकारी मिशन की यह पहल अगस्त 2021 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य केवल अधिक से अधिक पौधे लगाना नहीं,बल्कि समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना,पर्यावरण संरक्षण को जीवन-मूल्य बनाना और मनुष्य तथा प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध को मजबूत करना है। समय के साथ वननेस वन अभियान देशभर में व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप ले चुका है। विभिन्न राज्यों में अब तक लगभग 350 वृक्ष समूह स्थापित किए जा चुके हैं,जबकि 600 से अधिक वननेस वन स्थलों पर श्रद्धालु एवं सेवादार पौधों की देखभाल और संरक्षण में निरंतर जुटे हुए हैं। संत निरंकारी मिशन श्रीनगर ब्रांच के सहायक मीडिया प्रभारी गम्मा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में यह महाअभियान देशभर के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार 23 अगस्त से महाअभियान प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि देशभर में 630 स्थानों पर एक साथ आयोजित किए जा रहे इस अभियान में मिशन के लाखों श्रद्धालु और स्वयंसेवक सहभागिता निभाएंगे। अभियान के दौरान लगभग 10 लाख पौधों का रोपण किए जाने का लक्ष्य है। यह व्यापक अभियान केवल संख्या के लिहाज से बड़ा नहीं है,बल्कि इसके पीछे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामूहिक चेतना का संदेश भी निहित है। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता से पौधारोपण को जनअभियान बनाकर समाज के हर वर्ग को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वननेस वन अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि संत निरंकारी मिशन पौधारोपण के बाद अपनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं करता। लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने और उन्हें वृक्ष का स्वरूप देने के लिए तीन से पांच वर्षों तक नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प लिया गया है। इस प्रयास का उद्देश्य समय के साथ इन पौधों को विकसित कर सघन लघु वनों का स्वरूप देना है,जिससे स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा मिले,पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो तथा पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार हो सके। संत निरंकारी मिशन का यह अभियान इस बात को रेखांकित करता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों या कुछ संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाकर इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। बढ़ते प्रदूषण,जलवायु परिवर्तन,घटते वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के दौर में वननेस वन जैसी पहल समाज को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देती है। यह अभियान मनुष्य को यह भी स्मरण कराता है कि स्वच्छ वायु,जल,हरियाली और जैव विविधता किसी एक पीढ़ी की संपत्ति नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों का अधिकार है। संत निरंकारी मिशन श्रीनगर ब्रांच द्वारा भी इस अभियान को लेकर श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सहायक मीडिया प्रभारी गम्मा सिंह ने कहा कि पौधारोपण के साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस हरित अभियान से जुड़ने और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने का आह्वान किया। वननेस वन का संदेश स्पष्ट है कि प्रकृति से दूरी नहीं,प्रकृति के साथ समरसता ही स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का आधार है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनाने का संकल्प ले और उसकी जिम्मेदारी निभाए,तो आने वाले वर्षों में यही छोटे-छोटे प्रयास धरती को हरित,स्वच्छ और जीवनदायी बनाने की दिशा में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। एक पौधा-एक जिम्मेदारी-एक वृक्ष-अनेक जीवनों की सांस,यही वननेस वन के हरित संकल्प की वास्तविक शक्ति है।

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