तारों की दुनिया से रूबरू हुए नन्हे वैज्ञानिक-गढ़वाल विश्वविद्यालय में एस्ट्रोक्राफ्ट जूनियर कार्यशाला में खगोल विज्ञान की बारीकियां सीखीं

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित खगोल भौतिकी तारामंडल में प्राथमिक विद्यालयों के नन्हे विद्यार्थियों के लिए खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी से जुड़ी एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। खगोल विज्ञान अनुसंधान एवं विकास केंद्र (आईकार्ड) की ओर से आयोजित एस्ट्रोक्राफ्ट जूनियर प्रथम कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विज्ञान की किताबों से निकलकर तारों,ग्रहों और अंतरिक्ष की अद्भुत दुनिया को गतिविधियों एवं प्रयोगात्मक सीख के माध्यम से समझा। कार्यशाला का उद्देश्य प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों में खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी के प्रति जिज्ञासा,वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रुचि विकसित करना रहा। नन्हे विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस पहल ने उन्हें विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उसे देखने,समझने और अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यार्थियों में छोटी उम्र से ही वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा विकसित करना समय की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करने के साथ उनकी रचनात्मक क्षमता को भी नई दिशा देते हैं। एस्ट्रोक्राफ्ट जूनियर प्रथम इस श्रृंखला का पहला कार्यक्रम रहा। आयोजकों के अनुसार भविष्य में विभिन्न आयु एवं शैक्षणिक स्तर के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस श्रृंखला के अंतर्गत प्राथमिक,जूनियर और उच्च विद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के साथ-साथ अंतरविद्यालयी प्रतियोगिताओं,स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए भी विभिन्न शैक्षणिक एवं गतिविधि आधारित कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी जैसे रोचक एवं ज्ञानवर्धक विषयों से जोड़ना है। गतिविधियों के माध्यम से समझाया अंतरिक्ष विज्ञान
कार्यशाला में प्रशिक्षक श्री आशीष कांडपाल ने विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को बच्चों की आयु और समझ के अनुरूप सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराया गया। तारों,ग्रहों और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को गतिविधि आधारित तरीके से समझाए जाने के कारण बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। खगोल भौतिकी तारामंडल में विद्यार्थियों ने सीखने के साथ-साथ खगोल विज्ञान से संबंधित हस्तशिल्प गतिविधियों में भी उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। रचनात्मक गतिविधियों ने बच्चों को विज्ञान को अपने हाथों से करके समझने और वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप में आत्मसात करने का अवसर दिया। वैज्ञानिकों और शोधार्थियों से सीधे संवाद का अवसर कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों से सीधे संवाद करने का अवसर भी मिला। विद्यार्थियों ने खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक सवाल पूछे,जिनका विशेषज्ञों ने सरल भाषा में समाधान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में गढ़वाल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग,संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय सहयोग दिया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो.टी.सी.उपाध्याय,आईकार्ड संयोजक प्रो.हेमवती नंदन,डॉ.शुभ्रा काला,डॉ.संजय उपाध्याय,डॉ.सुनील कुमार,डॉ.विवेक शर्मा एवं डॉ.आशीष बहुगुणा सहित विभाग के शोधार्थी उपस्थित रहे। संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी जिज्ञासाओं को प्रोत्साहित किया तथा खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कक्षा से बाहर विज्ञान को अनुभव करने का मंच आईकार्ड एवं भौतिकी विभाग की यह पहल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यशाला ने बच्चों को यह समझने का अवसर दिया कि विज्ञान केवल पुस्तकों में पढ़ने का विषय नहीं,बल्कि उसे गतिविधियों,प्रयोगों और अनुभवों के माध्यम से भी समझा जा सकता है। विशेष रूप से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान से जोड़ने वाली यह पहल भविष्य में विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा को नई उड़ान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एस्ट्रोक्राफ्ट जूनियर श्रृंखला के माध्यम से गढ़वाल विश्वविद्यालय ने नन्हे विद्यार्थियों के लिए तारों और अंतरिक्ष की दुनिया के द्वार खोलते हुए वैज्ञानिक सोच को बचपन से ही मजबूत करने की दिशा में सार्थक पहल की है।

