स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान-कोट व घुड़दौड़ी में चिकित्सा शिविर,ग्रामीणों और छात्राओं ने लिया लाभ

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार के अंतर्गत जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोट और इंजीनियरिंग कॉलेज घुड़दौड़ी में विशेष चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं,किशोरियों,बच्चों और स्थानीय समुदाय को स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित करना था। शिविर का उद्घाटन ब्लॉक प्रमुख गणेश कोहली ने किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उपस्थित ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और मौके पर निशुल्क दवाइयां प्रदान कीं। इस शिविर में 210 से अधिक लोगों ने लाभ लिया। मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप,मधुमेह,कैंसर,किशोरियों व महिलाओं में एनीमिया की जांच,गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच व देखभाल,आयरन-कैल्शियम की खुराक,बच्चों का नि:शुल्क टीकाकरण,आंखों व कानों की जांच,टीबी की जांच व एक्स-रे,आयरन और एल्बेंडाजोल की दवा वितरण सहित विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को मौके पर उपचार और उचित परामर्श दिया। साथ ही महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गई। शिविर में कुल 13 दिव्यांग प्रमाणपत्र भी बनाए गए। इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ.अमित मेहरा,कनिष्ठ प्रमुख अनिल गुसाई,सांसद प्रतिनिधि संजय बलूनी,जिला उपाध्यक्ष भाजपा पूर्णिमा नेगी,नेत्र रोग विशेषज्ञ मोहित कुमार,बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.गोविंद पुजारी,ईएनटी डॉ.दिगपाल सिंह,हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.सचिन प्रभाकर सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इसी अभियान के तहत इंजीनियरिंग कॉलेज घुड़दौड़ी में भी चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया,जिसमें छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग,रक्तचाप,शुगर,नेत्र रोग,कान-नाक-गला,दंत रोग और हीमोग्लोबिन की निःशुल्क जांच की गई। छात्राओं को पोषण और मासिक धर्म स्वच्छता की महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गई। इस शिविर में 178 छात्र-छात्राओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में कॉलेज निदेशक डॉ.विजय कुमार बंगा,डॉ.शशांक उनियाल,आर.बी.एस.के.टीम डॉ.कंचन,आर.के.ए.के काउंलर स्वेता गुसाई,निम्मी कुकरेती,शकुंतला नेगी,अरुणा उनियाल सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे। दोनों शिविरों ने स्थानीय समुदाय और छात्र-छात्राओं को सकारात्मक स्वास्थ्य संदेश दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि नियमित जांच और समय पर उपचार से जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही महिलाओं और किशोरियों को पोषण,स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया। इन शिविरों ने यह साबित किया कि स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाना संभव है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और मजबूत किया जा सकता है।