देवभूमि गढ़वाल बच्छणस्यूं में डौंन्डियों कालिका के नव निर्मित मंदिर का हुआ भव्य उद्घाटन,भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल/रुद्रप्रयाग। देवभूमि गढ़वाल की पावन धरती बच्छणस्यूं में नवरात्र की शुभ बेला पर मां भगवती डौंडियों कालिका के नव निर्मित मंदिर का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य और लोक संस्कृति की परंपराओं से रची-बसी यह भूमि इस भव्य धार्मिक आयोजन में भक्तों की आस्था और उल्लास से गूंज उठी। मां भगवती डौंडियों कालिका जिन्हें दक्षिण कालिका के रूप में भी पूजा जाता है,ऐतिहासिक एवं पौराणिक सिद्धपीठ के नाम से विख्यात हैं। मंदिर के शिलालेख और लोक परंपराओं के अनुसार इसकी स्थापना लगभग संवत् 1741 (341 वर्ष पूर्व) खाती गुसाई वंशजों के गामा पहलवान द्वारा की गई थी। गुसाई परिवार माता को आकसेरा मायके की मान्यता से पूजता है। मंदिर के पुजारी कंडारस्यूं सरणा क्षेत्र से हैं,जबकि हवन-पूजन का दायित्व कांडई (चमोली) के पंडितों द्वारा निभाया गया। चल मूर्ति की पूजा-अर्चना परंपरागत रूप से खाती गुसाई परिवार द्वारा की जाती है,जिनमें अमर सिंह गुसाई,शिव सिंह गुसाई, कोतवाल सिंह गुसाई,शिक्षक जसपाल सिंह गुसाई,दयाल सिंह गुसाई,गजपाल सिंह गुसाई और कुंवर सिंह प्रमुख रूप से सम्मिलित थे। दुर्गा अष्टमी व नवमी के पावन संयोग पर नव निर्मित गर्भगृह में मां काली की शीला प्रवेश हुई। विपिन चमोली और महावीर प्रसाद पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चारण,कलश पूजन और हवन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। ढोल-दमाऊं की गूंज,देवी जयकारों और शंखनाद से डौंडियोंखाल भक्तिमय हो गया। मंदिर उद्घाटन में क्षेत्रीय महिला ध्याणियों ने पारंपरिक वेशभूषा और मंगल गीतों से आयोजन की शोभा बढ़ाई। भक्तों ने फूलमालाओं और चुनरी से मां का श्रृंगार कर कीर्तन-भजनों से पूरे परिसर को गूंजायमान कर दिया। ज्योतिषाचार्य डॉ.प्रकाश चमोली ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि मां भगवती कालिका भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। उनकी कृपा से जीवन में सुख,शांति और समृद्धि आती है। शिक्षक जसपाल सिंह गुसाई ने श्रद्धा भाव से कहा जो भी सच्चे मन और निष्कलुष भाव से माता के चरणों में आता है,उसके जीवन में नए उत्साह और शक्ति का संचार होता है। यह मंदिर हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है। मनोरम पहाड़ियों के बीच बांज,बुरांश और देवदार के घने जंगलों के समीप स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। पौड़ी और रुद्रप्रयाग जनपद की सीमा पर बसा यह मंदिर,न केवल धार्मिक दृष्टि से,बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। नव मंदिर उद्घाटन अवसर पर बच्छणस्यूं धारकोट ग्रामवासियों की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। डौंडियों कालिका मंदिर समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट,उपाध्यक्ष शम्भू सिंह,कोषाध्यक्ष हरी सिंह और संरक्षक रविन्द्र सिंह नेगी ने भंडारे का संचालन किया। भक्तों ने माता रानी का प्रसाद ग्रहण कर सामूहिक आस्था का आनंद साझा किया। मंदिर समिति ने इस डौंडियोंखाल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की अपील की है। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक भरत सिंह चौधरी,उत्तराखण्ड सरकार के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत से निवेदन किया कि इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिया जाए। यह मंदिर कंडारस्यूं-बच्छणस्यूं क्षेत्र का प्रमुख देवालय है। यहां हर वर्ष 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक विशाल मेला लगता है। परंपरा के अनुसार देवी के निशान केवल गुसाई परिवार द्वारा ही उठाए जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ढोल-दमाऊं की थाप पर मां भगवती अवतरित होकर भक्तों को शुभफल और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।