पंचतत्व आश्रम किष्किंधा बलोड़ी में विजयदशमी पर्व की धूम-रावण दहन ने दिया बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश

श्रीनगर गढ़वाल। विजयदशमी पर्व के अवसर पर जनपद पौड़ी के विकास खण्ड खिर्सू स्थित पंचतत्व आश्रम किष्किंधा बलोड़ी का प्रांगण धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उमंग से सराबोर रहा। यहां परंपरागत रावण दहन कार्यक्रम बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की विशेषता रही अमलानन्द जुयाल संस्कृत विद्यालय बलोड़ी के छात्र-छात्राओं की प्रस्तुति। बच्चों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों को नाट्य रूपांतरण और गीत-संगीत के माध्यम से जीवंत कर दिया। मंच पर उतरे राम,लक्ष्मण,सीता और हनुमान के किरदारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के उपरांत जब रावण का पुतला दहन किया गया तो पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने आतिशबाजी और तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इस आयोजन में आश्रम के व्यवस्थापक पारस चौहान ने कहा कि विजयदशमी पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि हर व्यक्ति अपने भीतर छिपी बुराइयों को त्यागकर सदाचार और धर्म के मार्ग पर चले। पंचतत्व आश्रम का उद्देश्य भी यही है कि समाज में प्रेम,सद्भाव और संस्कारों का वातावरण स्थापित हो। वहीं खिर्सू प्रधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष बृजमोहन बहुगुणा ने कहा कि यह पर्व केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है,बल्कि यह एक सामाजिक संदेश है कि जब हम सभी एकजुट होकर अच्छाई का साथ देते हैं तो असत्य और अहंकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं। आयोजन में जलेथा पंचायत के प्रधान जगमोहन चौहान,पूनम जुयाल,राजाराम सेमवाल,दिगम्बर सिंह भण्डारी,संजय पैन्यूली,सुभाष पुंडीर,गोवर्धन प्रसाद बहुगुणा,अवधेश बहुगुणा,योगेश बहुगुणा,अनमोल बहुगुणा,मुकुल चमोली,शिवम बहुगुणा,प्रिंस बहुगुणा,महेश घिल्डियाल,प्रिंस बहुगुणा,सर्वेश्वरी देवी,आभा देवी,मुन्नी देवी,नेहा चमोली सहित अनेक गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि विजयदशमी केवल पर्व ही नहीं बल्कि एक संदेश है कि असत्य,अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है और सत्य,धर्म व सद्गुणों की सदैव विजय होती है। रावण दहन का यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं,बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सामुदायिक एकता का भी उत्सव बन गया। बच्चे,युवा और बुजुर्ग सभी ने मिलकर विजयदशमी पर्व को ऐतिहासिक और यादगार बना दिया। अर्थपूर्ण समापन में खिर्सू के पंचतत्व आश्रम बलोड़ी में रावण दहन का यह आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायी रहा। इसने यह संदेश दिया कि यदि हम समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाने का संकल्प लें तो हर दिन हमारे लिए विजयदशमी बन सकता है।