पुरानी पेंशन बहाली को लेकर गरजा मशाल जुलूस

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बुधवार को जनपद मुख्यालय पौड़ी में कर्मचारियों और शिक्षकों ने काला दिवस मनाते हुए विशाल मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस केवल सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी का प्रतीक नहीं रहा,बल्कि पूरे समाज के सुरक्षित भविष्य की गूंज के रूप में देखा गया। प्रदेश अध्यक्ष जयदीप रावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब कर्मचारी किसी भी स्थिति में बिना पुरानी पेंशन के राजी नहीं होंगे। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि सरकार को यह मशालें याद दिलाती हैं कि यदि शीघ्र पुरानी पेंशन बहाल न की गई तो यह चिंगारी जल्द ही शोला बनकर उठेगी। प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने नई पेंशन योजना (एनपीएस) और यूनिवर्सल पेंशन सिस्टम (यूपीएस) को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि इन योजनाओं के तहत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी केवल एक या दो हजार रुपये की पेंशन पर निर्भर हो गए हैं। बुढ़ापे में यह राशि न तो गरिमा बनाए रख सकती है और न ही जीवन की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है। ऐसे में लाखों कर्मचारी खुद को आर्थिक और सामाजिक रूप से असहाय महसूस कर रहे हैं। जनपद अध्यक्ष भवान सिंह नेगी ने कहा कि यह विडंबना है कि एक दिन का विधायक या सांसद भी आजीवन पुरानी पेंशन का हकदार होता है,जबकि वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारी इससे वंचित रखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2005 से पूर्व नियुक्त कर्मचारियों को तो पुरानी पेंशन दी गई,लेकिन उसके बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को जब एनपीएस और यूपीएस का विकल्प चुनने के लिए कहा गया,तो अधिकांश ने इसे ठुकरा दिया। यह स्पष्ट संदेश है कि कर्मचारी केवल और केवल पुरानी पेंशन चाहते हैं। गढ़वाल मंडल महिला प्रभारी रनिता प्रसाद विश्वकर्मा ने इस आंदोलन को देश के हर मेहनतकश इंसान की लड़ाई बताते हुए कहा कि यह मशाल जुलूस सिर्फ कर्मचारियों का आक्रोश नहीं,बल्कि पूरे समाज की असुरक्षा के खिलाफ उठी आवाज है। उन्होंने कहा कि अगर पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई तो यह असंतोष केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि लोकतांत्रिक स्वरूप को भी नई दिशा देगा। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि अब केवल मांगपत्र देने और चेतावनी जारी करने का दौर खत्म हो चुका है। यह मशाल जुलूस घोषणा कर रहा है कि जल्द ही राष्ट्रीय पेंशन सत्याग्रह की शुरुआत होगी,जिसमें करोड़ों कर्मचारी,उनके परिवार और समाज के अन्य वर्ग मिलकर शांतिपूर्ण बगावत करेंगे। महिला शक्ति भी इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर आगे आ रही है। इस अवसर पर निर्मला राणा,रघुराज सिंह चौहान,दीपक गोडियाल,प्राची,अंकित बागवानी,संजीव,विकास रावत,प्रभा खर्कवाल,नीलम नेगी,पूजा नेगी,संगीता असवाल,रेनू,विजयलक्ष्मी,त्रिलोक नेगी,जे.एस.रावत,रश्मि, मंजू,चंद्रिका,मीनाक्षी रावत,मंजूलता,मंजू असवाल,रिंकी,हिमानी,सुशील कुमार,अंकित कठैत,संदीप भट्ट,कुलदीप रावत सहित भारी संख्या में कर्मचारी और शिक्षक मौजूद रहे। सभा का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्ष अब प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि सीधे संसद के दरवाजों तक पहुंचेगा।