Friday 01/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
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उत्तराखण्ड

पहाड़ों में इंसानों पर जंगली जानवरों का आतंक,खेती चौपट,लोग पलायन को मजबुर


श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इंसानों का जीवन दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ जंगली जानवरों का आतंक ग्रामीणों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। गांव-गांव में भालू,बाघ,जंगली सूअर और बंदरों की दहशत इस कदर बढ़ चुकी है कि लोग खेत-खलिहानों में जाने से डरने लगे हैं। ताजा घटना रुद्रप्रयाग जनपद के बच्छणस्यूं क्षेत्र के चौंथला गांव में हुई,जहां गिरीश चंद्र मलासी भालू के हमले में बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें गंभीर हालत में देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा कर रही है। कभी खेती-किसानी को अपनी आजीविका का आधार बनाने वाले ग्रामीण आज मजबूर होकर खेती छोड़ रहे हैं। धान,मक्का,आलू,चौलाई और सब्जियों की फसलें जंगली सूअरों व बंदरों से चौपट हो रही हैं,वहीं बाघ और भालू जैसे खतरनाक जानवर लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और वन विभाग जंगली जानवरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं,लेकिन इंसानों की सुरक्षा और रोजगार की चिंता किसी को नहीं है। उनका कहना है कि यदि यही हालात रहे तो आने वाले समय में पहाड़ों में इंसानों से ज्यादा जंगली जानवर दिखाई देंगे और गांव इतिहास बनकर रह जाएंगे। ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए ठोस और स्थायी योजना बनाई जाए। खेतों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग,बंदरों की नसबंदी,जंगली सूअरों की रोकथाम और बाघ-भालुओं की निगरानी जैसे कदम तुरंत उठाए जाएं। तभी लोग अपनी जमीन और घरों से जुड़े रह पाएंगे।

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