सहकारिता मेले में बाहरी व्यापारियों की भागीदारी पर श्रीनगर व्यापार मंडल का एतराज

श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर शहर के व्यापारियों ने सहकारिता मेले में बाहरी जिलों के व्यापारियों को दी जा रही अनुमति पर कड़ा विरोध जताया है। व्यापार मंडल श्रीनगर गढ़वाल ने स्पष्ट कहा कि यह मेला स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित होता है,परंतु इस बार बाहरी व्यापारियों को प्राथमिकता दिए जाने से नगर के छोटे कारोबारियों के हितों पर गहरा असर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापार मंडल श्रीनगर गढ़वाल के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय विधायक एवं सहकारिता,उच्च शिक्षा तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि आगामी 7 अक्टूबर से शुरू होने वाले सहकारिता मेले में नगर क्षेत्र के बाहर से बड़ी संख्या में व्यापारी भाग ले रहे हैं,जिससे स्थानीय व्यापारियों की बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। व्यापार मंडल अध्यक्ष दिनेश असवाल ने कहा कि स्थानीय व्यापारी पहले ही आर्थिक मंदी,ऑनलाइन व्यापार और बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में सहकारिता मेला उनके लिए राहत की उम्मीद लेकर आता है,लेकिन यदि बाहरी व्यापारी ही अधिकांश स्टॉल ले जाएंगे तो स्थानीय दुकानदारों के सामने रोज़गार का संकट और गहरा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों का हित सर्वोपरि है और जिस मेले का आयोजन सहकारिता जिला मुख्यालय में होना चाहिए,उसे श्रीनगर में करवाने का औचित्य ही संदिग्ध है,क्योंकि अगले महीने श्रीनगर में पारंपरिक बैकुंठ चतुर्दशी मेला आयोजित होना है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में लगातार दो बड़े मेले लगाने से स्थानीय व्यापार को नुकसान झेलना पड़ सकता है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि मेले में स्थानीय व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाए और बाहरी प्रतिभागियों की संख्या सीमित रखी जाए,ताकि श्रीनगर की पारंपरिक बाजार संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को संबल मिल सके। इस मौके पर व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल,कोषाध्यक्ष सुमन जोशी और नगर निगम पार्षद एवं व्यापारी उज्जवल अग्रवाल उपस्थित रहे। ज्ञापन पर प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष बासुदेव कंडारी सहित कई पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। व्यापारियों ने भरोसा जताया है कि मंत्री डॉ.धन सिंह रावत इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर स्थानीय व्यापारियों के हित में ठोस निर्णय लेंगे। अंत में मंडल ने कहा श्रीनगर का व्यापार श्रीनगर वासियों से ही जुड़ा है,स्थानीय व्यापार ही इस शहर की पहचान है,और इसकी सुरक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी।