आस्था,साधना और संस्कृति का पावन धाम शिव गोरखनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर भटोली में महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को भव्य आयोजन

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में सचमुच कण-कण में ईश्वर का वास है। इन्हीं पावन पहाड़ियों के मध्य स्थित जय शिव गोरखनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर भटोली आज भक्ति,आस्था और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। ऊंची चोटी पर एकांत और शांत वातावरण में स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मन की शांति, साधना और शिव कृपा का अद्वितीय स्थल है। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि का पर्व यहां बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी रविवार को पड़ रही है। भक्तजन 15 फरवरी को व्रत,पूजन एवं रात्रि जागरण करेंगे तथा 16 फरवरी,सोमवार को व्रत का पारण (उद्यापन) करेंगे। मंदिर परिसर में विशेष पूजन,रुद्राभिषेक,भजन-कीर्तनऔर प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और हर-हर महादेव तथा जय गुरू गोरखनाथ के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के साथ गुरु गोरखनाथ भी विराजमान हैं। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे भाव से यहां आता है,उसे उसकी श्रद्धा के अनुरूप फल प्राप्त होता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां रोग,दोष और जीवन की विभिन्न बाधाओं से मुक्ति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और शिव-गुरु की संयुक्त कृपा से कष्टों का निवारण होता है। मंदिर के महंत नरेश भारती के मार्गदर्शन में यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना,जप-तप और साधना का क्रम चलता रहता है। उनका कहना है कि यह धाम केवल पूजा का स्थान नहीं,बल्कि आत्मिक जागरण का केंद्र है। यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। समय-समय पर यहां वृक्षारोपण,स्वच्छता अभियान,भजन-कीर्तन तथा भंडारे जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में स्थानीय ग्रामीणों के साथ युवा पीढ़ी भी बढ़-चढ़कर भाग लेती है,जिससे समाज में एकता और सद्भाव का संदेश प्रसारित होता है। साधना के लिए सर्वोत्तम स्थान ऊंची पहाड़ी पर एकांत में स्थित यह मंदिर साधकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। शांत वातावरण,प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण यह स्थान जप-तप और ध्यान के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार इस मंदिर में किसी भी गांव का सूतक प्रभावी नहीं होता,जिससे यहां निरंतर पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहता है। गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर भटोली आज श्रद्धा,संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बनकर उभर रहा है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ एक बार फिर यह सिद्ध करेगी कि देवभूमि की आत्मा आज भी अपनी परंपराओं और आस्थाओं से गहराई से जुड़ी हुई है।
