शुरुआत से पहले ही चुनौती-चारधाम यात्रा रूट पर मलवा-बोल्डर का अंबार,कांग्रेस ने सरकार की तैयारियों पर उठाए सवाल

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की आस्था का सबसे बड़ा पर्व मानी जाने वाली चारधाम यात्रा की शुरुआत भले ही हो चुकी हो,लेकिन यात्रा मार्गों की जमीनी हकीकत ने तैयारियों की पोल खोल दी है। जगह-जगह सड़क किनारे पड़े मलवे और बोल्डरों ने न केवल यात्रा की सुगमता पर सवाल खड़े किए हैं,बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी लाल सिंह नेगी ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की कि यात्रा मार्गों पर पड़े मलवे और बड़े पत्थरों को अविलंब हटाया जाए,ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा और जोखिम का सामना न करना पड़े। लाल सिंह नेगी ने कहा कि शासन द्वारा पहले ही सड़कों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए थे,लेकिन हकीकत यह है कि कई स्थानों पर अब भी रास्ते अवरुद्ध या जोखिमपूर्ण बने हुए हैं। सरकार व्यवस्था पूरी होने का दावा कर रही है,लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं। उन्होंने यात्रा के उत्साह में कमी का एक बड़ा कारण एलपीजी गैस की किल्लत को भी बताया। होटल और ढाबा संचालक सिलेंडर न मिलने से अपनी किचन व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं,जिससे यात्रियों की सुविधाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। श्रद्धालुओं में दिखी चिंता,यात्रा शुरू होने के बावजूद स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं को भी मार्ग की स्थिति और व्यवस्थाओं को लेकर असहजता महसूस हो रही है, जिससे यात्रा का उत्साह अपेक्षाकृत कम नजर आ रहा है। तत्काल सुधार की मांग
कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की है कि यात्रा मार्गों से तुरंत मलवा और बोल्डर हटाए जाएं,गैस आपूर्ति सुचारू की जाए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को युद्धस्तर पर दुरुस्त किया जाए ताकि चारधाम यात्रा बिना किसी बाधा के सुचारू और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके। चारधाम यात्रा जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में तैयारियों की कमी और जमीनी चुनौतियां प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार कितनी तेजी से इन समस्याओं का समाधान कर श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रख पाती है।
