Wednesday 22/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
मसूरी-देहरादून मार्ग पर राहत की तैयारी, सीएम धामी ने बेली ब्रिज का किया निरीक्षण, जल्द दूसरा पुल के निर्माण को पूरा करने के दिये निर्देशचारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन से पहले सड़कों को दुरुस्त करने के आदेश, 2 से 3 दिन में मसूरी देहरादून मार्ग पर बनने वाला दूसरा बेली ब्रिज तैयार होने का दावारिपोर्टर सुनील सोनकरमसूरी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी-देहरादून मार्ग पर निर्माणाधीन बेली ब्रिज का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि आगामी पर्यटन सीजन और चारधाम यात्रा को देखते हुए सभी प्रमुख मार्गों को समय रहते दुरुस्त किया जाए, ताकि यात्रियों और पर्यटकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मसूरी-देहरादून मार्ग पर बन रहे बेली ब्रिज के समानांतर दूसरा बेली ब्रिज भी जल्द तैयार किया जाए। इससे यातायात सुचारु रूप से संचालित हो सकेगा और जाम की समस्या से राहत मिलेगी।2 से 3 दिन में दूसरा बेली ब्रिज तैयार होने का दावासीएम धामी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शिव मंदिर के पास क्षतिग्रस्त पुल के कारण मार्ग संचालन में दिक्कत आ रही थी, जिसे देखते हुए अस्थायी बेली ब्रिज बनाया गया था। अब दूसरा बेली ब्रिज भी तेजी से तैयार किया जा रहा है और इसे अगले 2 से 3 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।स्थायी पुल पर भी तेजी से काममुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी (पक्का) पुल निर्माण का कार्य भी प्रगति पर है, जिसे अगले 2 से 3 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भविष्य में इस मार्ग पर यातायात और अधिक सुगम होगा।पर्यटन और यात्रा को ध्यान में रखकर तैयारीउन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक प्रमुख पर्यटन राज्य है, जहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि सड़कों और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि किसी को भी असुविधा का सामना न करना पड़े।बीआरआ को भी निर्देशमुख्यमंत्री ने बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) को भी उनके अधीन आने वाले मार्गों को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि यात्रा सीजन से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो सकें।लंढौर क्षेत्र में जमीन धंसाव का खतरा गहराया, सड़क में दरारों से दहशत, तत्काल कार्रवाई की मांग मसूरी। मसूरी के लंढौर क्षेत्र में भू-धंसाव और सड़क में पड़ती दरारों ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर लोगों ने प्रशासन से त्वरित और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर पड़ रही दरारें दिन-ब-दिन चौड़ी होती जा रही हैं। इन दरारों से बारिश और सीपेज का पानी रिसकर आसपास के भवनों की नींव को कमजोर कर रहा है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई है। स्थिति केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।कानूनों के नाम पर असंतुलन-श्रीनगर गोष्ठी में आरक्षण,एट्रोसिटी और यूजीसी नियमों पर बड़ा मंथनउफल्डा के आरसी मेमोरियल स्कूल में बेटियों का जलवा-खेल प्रतिभाओं का सम्मान,पहाड़ से उठ रही नई उड़ाननेगी ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक धुरी-गढ़वाल विश्वविद्यालय में गूंजा लोकसंगीत का जादूउच्च शिक्षा के 80 शिक्षक लेंगे आईआईएससी बेंगलुरु में प्रशिक्षणसमलौण से सजी श्रद्धांजलि-पौधारोपण के माध्यम से मां की स्मृति को दिया जीवन,श्रीनगर में अनोखी पहलवन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु समीक्षा बैठक,हितधारकों से संवाद में वन गुज्जरों के अधिकारों के संरक्षण पर विशेष जोरआवासीय खेल छात्रावासों में प्रवेश शुरू,10 मई तक करें आवेदनस्वस्थ मां-सशक्त भविष्य-असगढ़ कल्जीखाल में गोद भराई कार्यक्रम के साथ पोषण पखवाड़ा ने जगाई जागरूकता
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नेगी ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक धुरी-गढ़वाल विश्वविद्यालय में गूंजा लोकसंगीत का जादू


श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में नरेन्द्र संगीत पर केन्द्रित सात दिवसीय कार्यशाला के पांचवें दिन का आयोजन लोक-संस्कृति,संगीत और भावनाओं के अद्भुत संगम का साक्षी बना। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं रंगकर्मी दीपक डोभाल ने किया,जिन्होंने अपने उद्बोधन में नरेन्द्र सिंह नेगी को उत्तराखण्ड की संस्कृति का सबसे बड़ा आलोक स्तम्भ बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस स्तम्भ पर उत्तराखण्ड की पूरी लोक-संस्कृति टिकी है,उसका नाम नरेन्द्र सिंह नेगी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नेगी के इर्द-गिर्द खड़ी यह सांस्कृतिक परंपरा इतनी विराट है कि उसे स्वीकार करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए। संसद टीवी में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके दीपक डोभाल ने भावुक होते हुए विश्वविद्यालय से अपने पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि इस प्रेक्षागृह की एक-एक ईंट को बनते हुए देखने के बाद आज उसी मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में खड़ा होना उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रेक्षागृह ने श्रीनगर को उत्तराखण्ड के रंगमंच के मानचित्र पर स्थापित किया है। उत्तराखण्ड की रंगमंचीय परंपराओं-चक्रव्यूह,पाण्डव नृत्य और मुखौटा शैली को उन्होंने अद्वितीय बताया और कहा कि यहां महाभारत केवल कथा नहीं,बल्कि जीवंत परंपरा के रूप में विद्यमान है,अपने अभिनय अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि नेगी जी के गीतों पर अभिनय ने उन्हें पहचान और लोकप्रियता दिलाई। साहित्यिक मंच पर प्रवेश का श्रेय भी उन्होंने नेगी जी को देते हुए इस कार्यशाला में शामिल होना अपने लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। कार्यशाला के पांचवें दिन प्रतिभागी कलाकारों ने नेगी के गीतों की विविधता से ऐसा समां बांधा कि पूरा प्रेक्षागृह भावविभोर हो उठा। अखिलेश कोहली ने अबरि दौं तू लम्बी छुट्टि गाकर टिहरी की डूबती यादों को जीवंत कर दिया,वहीं प्रिया ठक्कर,अंशिका पंवार,अंजलि रावत,हार्दिक कण्डारी,राजेन्द्र जोशी,कुसुम खत्री,किरण जोशी,शालिनी डालिया और प्रमीत कुमार ने अपने-अपने गायन से कार्यक्रम में रंग भर दिए। दृष्टिबाधित कलाकार सौरभ थपलियाल ने मुल-मुल केकू हैंसणी गीत प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी और यह साबित किया कि सच्ची प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। चम्बा से आए कलाकार राजेन्द्र जोशी ने पर्वतीय पक्षियों-हिलांस,घुघूती और कागा की आवाजों की सजीव प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। सम्मान और संचालन कार्यक्रम के अंत में डॉ.राहुल बहुगुणा ने प्रतिभागी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.संजय पाण्डेय और गणेश खुगशाल गणी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला का यह दिन केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं,बल्कि उत्तराखण्ड की लोक आत्मा को महसूस करने का जीवंत अवसर बन गया,जहां हर सुर में अपनी मिट्टी की खुशबू और अपनी पहचान की झलक साफ दिखाई दी।

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