श्रीनगर के गोलापार्क में गूंजा श्रमिक एकता का स्वर-मजदूर दिवस पर उठी श्रम कानूनों के खिलाफ बुलंद आवाज

श्रीनगर गढ़वाल। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर श्रीनगर के ऐतिहासिक गोलापार्क में अखिल भारतीय यूनाइटेड ट्रेड यूनियन केंद्र (एआईयूटीयूसी) द्वारा एक प्रभावशाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिकों,सामाजिक कार्यकर्ताओं,छात्र संगठनों एवं आमजन की भागीदारी रही,जहां श्रमिक अधिकारों,वर्तमान श्रम नीतियों और मजदूरों की समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा की गई। सभा को संबोधित करते हुए भारत संचार निगम लिमिटेड के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पी.वी.डोभाल ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार श्रम कानूनों में बदलाव को मिठास के साथ प्रस्तुत कर रही है,जबकि वास्तविकता यह है कि चार नए श्रम कानून मजदूर वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने वाले साबित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुनियोजित तरीके से श्रमिक संगठनों को कमजोर कर रही है और मजदूरों को बड़े उद्योग घरानों के हितों के अनुरूप काम करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता भरत सिंह असवाल ने अपने संबोधन में मजदूरों की वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि आज श्रमिक वर्ग आर्थिक,सामाजिक और मानसिक दबावों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई,रोजगार की अनिश्चितता और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने मजदूरों का जीवन कठिन बना दिया है। सभा को संबोधित करते हुए मुकेश सेमवाल ने कहा कि आज का मजदूर अमानवीय परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर है। उन्होंने एलपीजी संकट का जिक्र करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की कठिनाइयों के कारण मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं,जिससे भविष्य में श्रम व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कार्यक्रम के दौरान भारत संचार निगम लिमिटेड के श्रमिक नेता गणेश कला और प्रमोद कुमार ने अपने प्रेरणादायक श्रमिक गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह में जोश और उत्साह का संचार किया। वहीं छात्र संगठन ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) के सदस्यों ने भी जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन मोनिका चौहान द्वारा किया गया। अंत में आयोजकों ने श्रमिक एकता को मजबूत करने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। मजदूर दिवस के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि श्रमिक वर्ग अब अपने अधिकारों के प्रति सजग है और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने को तैयार है।
