श्रमिकों के अधिकारों की गूंज से गुंजायमान हुआ पालिका सभागार-विधिक जागरूकता शिविर में मिला न्याय और सुरक्षा का भरोसा

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर नगर पालिका परिषद पौड़ी के सभागार में आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर ने श्रमिकों के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण को नई दिशा देने का कार्य किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रमिकों,कर्मचारियों एवं आमजन को उनके कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सहायता की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। शिविर के मुख्य वक्ता सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज नाजिश कलीम ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय तक आसान और त्वरित पहुंच हर नागरिक का अधिकार है,और इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है,जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी बिना किसी बाधा के न्याय प्राप्त कर सके। उन्होंने लोक अदालत की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह व्यवस्था आमजन के लिए सुलभ,त्वरित और कम खर्चीली न्याय प्रणाली है,जिसके माध्यम से श्रम विवादों सहित विभिन्न मामलों का समाधान आपसी सहमति से किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने श्रम कानूनों के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए श्रमिकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के अंतर्गत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलने वाली सुविधाओं,ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के महत्व,सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को मिलने वाली कानूनी सहायता के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग समाज की रीढ़ है और उनके अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उपस्थित श्रमिकों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या या शोषण की स्थिति में बिना झिझक विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें और उपलब्ध सेवाओं का लाभ उठाएं। इस अवसर पर नगर पालिका के प्रशासनिक अधिकारी सोबन सिंह नेगी,उपनिरीक्षक संजय असवाल,संरक्षण अधिकारी प्रज्ञा नैथानी,वन स्टॉप सेंटर की अमृता रावत,सेनेटरी इंस्पेक्टर हेमंत कुमार,अधिकार मित्र लक्ष्मी नेगी,सोनम ममगांई सहित नगर पालिका परिषद के कर्मचारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन श्रमिकों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें न्याय दिलाने के संकल्प के साथ हुआ,जो समाज में समानता और न्याय की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
