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विकास की रफ्तार या विनाश की आहट? मसूरी की वहन क्षमता पर बढ़ता दबाव, अनूप नौटियाल ने उठाए सवालपहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार बढ़ते निर्माण कार्य, नई सड़क परियोजनाएं और पर्यटन दबाव अब चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। मशहूर सोशल एक्टिविस्ट अनुप नौटियाल ने मसूरी की “केयरिंग कैपेसिटी” यानी वहन क्षमता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में मसूरी को भारी पर्यावरणीय और यातायात संकट का सामना करना पड़ सकता है।अनूप नौटियाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रिपोर्ट के अनुसार मसूरी की पार्किंग क्षमता केवल 1240 वाहनों की है, लेकिन इसके बावजूद लगातार ऐसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ाए जा रहे हैं, जिनसे मसूरी में पर्यटकों और वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, वैकल्पिक सड़कें और रोपवे जैसी परियोजनाएं कनेक्टिविटी तो बढ़ा रही हैं, लेकिन शहर की वास्तविक क्षमता को नजरअंदाज किया जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब मसूरी पहले ही हर वीकेंड और पर्यटन सीजन में जाम, पानी की कमी, पार्किंग संकट और कूड़ा निस्तारण जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तो अतिरिक्त दबाव को आखिर शहर कैसे झेलेगा। उनका कहना है कि विकास योजनाओं के साथ यह भी तय होना चाहिए कि शहर कितना भार वहन कर सकता है और उसके अनुरूप ही पर्यटकों की संख्या तथा निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित किया जाना चाहिए।नौटियाल ने कहा कि बिना दीर्घकालिक योजना के लगातार निर्माण कार्य और पर्यटन विस्तार पहाड़ों की पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अंधाधुंध विकास के कारण भूस्खलन, जल संकट, ट्रैफिक जाम और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।स्थानीय लोगों का भी कहना है कि मसूरी में पहले ही हालात बदतर होते जा रहे हैं। वीकेंड पर घंटों जाम, पार्किंग के नाम पर मनमानी वसूली, पानी और बिजली की समस्या तथा बढ़ता प्रदूषण पर्यटन नगरी की पहचान को प्रभावित कर रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन ने समय रहते “सस्टेनेबल टूरिज्म मॉडल” नहीं अपनाया तो मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन कारोबार दोनों प्रभावित होंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि मसूरी जैसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं को लागू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, संसाधनों की उपलब्धता और वहन क्षमता का गंभीर अध्ययन जरूरी है। अन्यथा पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाएं ही भविष्य में शहर के लिए सबसे बड़ा संकट बन सकती हैं।

