सेवा,संस्कार और स्वच्छता का संगम-शंकर मठ में भागीरथी कला संगम का प्रेरणादायी अभियान

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरा श्रीनगर में सामाजिक जागरूकता और सेवा भाव का एक प्रेरणादायी उदाहरण उस समय देखने को मिला,जब सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था भागीरथी कला संगम के तत्वावधान में प्राचीन शंकर मठ मंदिर (एसएसबी परिसर) में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। रविवार 3 मई की प्रातःकालीन बेला में सुबह 6 बजे संस्था के समर्पित एवं कर्मठ सदस्य मंदिर परिसर में एकत्रित हुए और पूरे उत्साह,अनुशासन एवं सेवा भावना के साथ सफाई अभियान का शुभारंभ किया। लगभग ढाई घंटे तक चले इस विशेष अभियान में सभी सदस्यों ने तन-मन से योगदान देते हुए मंदिर परिसर को स्वच्छ,सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। बताया गया कि हाल ही में आए तूफान के कारण मंदिर परिसर के आसपास भारी मात्रा में कूड़ा-करकट जमा हो गया था,जिसे संस्था के जांबाज सदस्यों ने युद्ध स्तर पर हटाकर पूरी तरह साफ किया। इस दौरान सदस्यों का जोश,समर्पण और एकजुटता देखते ही बन रही थी,मानो यह केवल सफाई नहीं बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी का जीवंत प्रदर्शन हो। इस अवसर पर शंकर मठ के महंत महादेव प्रसाद उनियाल ने संस्था के इस सराहनीय कार्य के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भागीरथी कला संगम के सदस्य आज समाज के लिए एक मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका यह प्रयास न केवल स्वच्छता का संदेश देता है,बल्कि समाज को जागरूक करने की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था के सचिव पदमेंद्र रावत ने कहा कि संस्था विगत कई वर्षों से श्रीनगर एवं आसपास के क्षेत्रों में निःस्वार्थ भाव से स्वच्छता अभियान चला रही है। मुझे गर्व है कि मैं भी इस संस्था का एक सक्रिय कार्यकर्ता हूं,जो समाजहित में निरंतर कार्यरत है। वहीं संस्था के कोषाध्यक्ष हरेंद्र तोमर एवं सांस्कृतिक सचिव संजय कोठारी ने कहा कि संस्था के कार्यों से प्रेरित होकर शहर के अनेक बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं,जो संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए सहयोग दे रहे हैं। संस्था अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने महंत जी का आभार व्यक्त करते हुए उपस्थित सदस्यों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि हमें इसी प्रकार निरंतर समाजहित में कार्य करते रहना चाहिए। स्वच्छता और सेवा ही हमारी पहचान बने। कार्यक्रम के अंत में संस्था के वरिष्ठ संरक्षक रमेश चंद्र थपलियाल ने सभी सदस्यों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सच्ची सेवा वही है जिसमें अहंकार न हो। संस्था के सदस्य स्वच्छ और निर्मल भाव से कार्य कर रहे हैं,जो वास्तव में अनुकरणीय है। उन्होंने उपस्थित एवं अनुपस्थित सभी सदस्यों के प्रति आभार एवं अभिनंदन प्रकट किया। इस दौरान वरिष्ठ सदस्य भगत सिंह विष्ट,धर्मेन्द्र,रवि पुरी,रघुवीर सिंह रावत,मदन गड़ोई सहित अन्य गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। अंततः यह स्वच्छता अभियान न केवल एक सामाजिक कार्य रहा,बल्कि यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरण का भी प्रतीक बनकर उभरा,जिसने समाज को यह संदेश दिया कि-जब जागरूक नागरिक एकजुट होते हैं,तो परिवर्तन निश्चित होता है।
