Sunday 19/ 07/ 2026 

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गर्भावस्था में दुर्लभ हाइडेटिड सिस्ट का सफल ऑपरेशन-बेस अस्पताल श्रीनगर के चिकित्सकों ने बचाई मां और गर्भस्थ शिशु की जिंदगी


श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से संबद्ध हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए गर्भावस्था के दौरान एक अत्यंत जटिल एवं दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने जोशीमठ क्षेत्र की 25 वर्षीय,तीन माह की गर्भवती महिला के पेट से अंडेदानी के समीप स्थित दुर्लभ हाइडेटिड सिस्ट सहित दो बड़ी गांठों (13 एवं 9 सेंटीमीटर) को सुरक्षित निकालकर न केवल मां का जीवन बचाया,बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी पूरी तरह सुरक्षित रखा। चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था में इस प्रकार की सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण मानी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार महिला पेट में लगातार दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी। प्रारंभिक जांच और अल्ट्रासाउंड में बच्चेदानी के समीप दो बड़ी सिस्ट होने का पता चला। इनमें से एक हाइडेटिड सिस्ट अंडेदानी के पास स्थित थी,जो चिकित्सा विज्ञान में अत्यंत दुर्लभ स्थिति मानी जाती है। विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञों की राय के बाद ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। गायनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.नेहा दोसाद के निर्देशन में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.निधि बहुगुणा तथा सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.लक्ष्मण यादव ने पूरी विशेषज्ञता और सूझबूझ के साथ इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न किया। ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने दोनों सिस्ट को सावधानीपूर्वक निकालते हुए गर्भस्थ शिशु को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया। डॉ.निधि बहुगुणा ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान दोनों अंडेदानियों को सुरक्षित रखा गया। सिस्ट से प्रभावित ओवरी का सफल ओवेरियन रिकंस्ट्रक्शन (अंडेदानी का पुनर्निर्माण) भी किया गया,जिससे महिला की भविष्य की प्रजनन क्षमता सुरक्षित बनी रहेगी। सर्जरी के बाद किए गए अल्ट्रासाउंड में गर्भस्थ शिशु की धड़कन,विकास और अन्य सभी पैरामीटर पूरी तरह सामान्य पाए गए,जिससे चिकित्सकीय टीम ने राहत की सांस ली। इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की डॉ.वंदना शर्मा,डॉ.कीर्तना,डॉ.रोहित,पियूष तथा रोहित ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी विभागों के समन्वित प्रयास,आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता के कारण यह जटिल ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सफल सर्जरी के बाद महिला और उसके परिजनों ने चिकित्सकीय टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर सही उपचार मिलने से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं,जो उनके लिए किसी नए जीवन से कम नहीं है। इस उपलब्धि पर राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य प्रो.आशुतोष सयाना ने पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि गर्भवती महिला की दुर्लभ एवं जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देना संस्थान के चिकित्सकों की विशेषज्ञता,अनुभव और उत्कृष्ट टीमवर्क का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को सुरक्षित रखते हुए इस प्रकार का ऑपरेशन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है,जिसे बेस अस्पताल के चिकित्सकों ने पूरी सफलता के साथ संपन्न कर चिकित्सा सेवा के उच्च मानकों को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि बेस अस्पताल श्रीनगर लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यह सफलता न केवल मेडिकल कॉलेज,बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है।

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