पौड़ी में औद्योगिक विकास को मिली नई रफ्तार-जिला प्राधिकृत समिति ने पांच नई औद्योगिक इकाइयों को दी सैद्धांतिक स्वीकृति

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पर्वतीय जनपद पौड़ी गढ़वाल में औद्योगिक विकास और स्थानीय रोजगार को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शासन की निवेश प्रोत्साहन नीति को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करते हुए जिला प्रशासन ने नए उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया है। इससे न केवल जनपद में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी,बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की दिशा में यह पहल भविष्य के आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला साबित होगी। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी की अध्यक्षता में शुक्रवार को विकास भवन सभागार में उद्योग विभाग के तत्वावधान में सिंगल विंडो सिस्टम के अंतर्गत गठित जिला प्राधिकृत समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाइयों से जुड़े विभिन्न आवेदनों पर गंभीरता से विचार-विमर्श करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के दौरान समिति के समक्ष उद्योग स्थापना से संबंधित छह प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। गहन परीक्षण और आवश्यक औपचारिकताओं के उपरांत पांच औद्योगिक इकाइयों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई,जबकि एक होटल परियोजना के आवेदन में आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन औद्योगिक इकाइयों के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जाने हैं,उनके सभी लंबित प्रकरणों का माह के अंत तक हर हाल में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि निवेशकों को समयबद्ध,पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए औद्योगिक परियोजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारने में सहयोग करें। समिति द्वारा जिन औद्योगिक इकाइयों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई,उनमें एक एडिबल नट प्रोसेसिंग यूनिट,दो सोलर पावर प्लांट,एक आयुर्वेदिक हर्बल सप्लीमेंट निर्माण इकाई तथा एक कोरोगेटेड बॉक्स निर्माण इकाई शामिल हैं। इन उद्योगों की स्थापना से जनपद में औद्योगिक निवेश को नई गति मिलेगी,स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा मिलने से सतत विकास की दिशा भी मजबूत होगी। बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर भी बल दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता दी जाए,जो स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना सकें। इससे पलायन की समस्या को कम करने और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। बैठक में महाप्रबंधक उद्योग सोमनाथ गर्ग,लीड बैंक प्रबंधक,मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र सिंह खाती,उप प्रभागीय वनाधिकारी आयशा बिष्ट,जिला पर्यटन विकास अधिकारी कमल किशोर जोशी सहित जिला प्राधिकृत समिति के सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
