Wednesday 26/ 08/ 2026 

Bharat Najariya
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दोगुना मुनाफे का झांसा देकर 3.30 करोड़ की ठगी,कथित डॉक्टर बहन गुजरात से गिरफ्तार


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। एक साल में निवेश की रकम दोगुनी करने का सपना दिखाया गया और भरोसे के नाम पर करोड़ों रुपये जुटा लिए गए। जब मुनाफा तो दूर,मूलधन वापस मांगने की बारी आई तो निवेशकों के सामने कथित धोखाधड़ी का ऐसा जाल खुला,जिसने पूरे मामले को गंभीर आर्थिक अपराध का रूप दे दिया। पौड़ी पुलिस ने लंबे समय से चल रहे इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह की कथित प्रमुख सहयोगी एवं मुख्य आरोपी की बहन डॉ.ज्योति श्रॉफ को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी महिला निवेशकों का विश्वास जीतने और उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। मामला 3 करोड़ 30 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। पुलिस की विवेचना में फर्जी पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल,निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने तथा आपराधिक षड्यंत्र में कई लोगों की भूमिका सामने आई है। प्रकरण में अन्य आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। पुलिस के मुताबिक 12 जनवरी 2024 को वादिनी शैली लिंगवाल ने राजस्व क्षेत्र पट्टी सितोंस्यू में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिगनेश श्रॉफ,सुनील दामू मूले,ज्योति श्रॉफ,श्रीकांत परमार और चिंतन शाह आदि ने स्वयं को श्री महाकाली ग्रुप कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए वर्ष 2021-22 में वादिनी,उनके पति,रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया। आरोपियों ने कथित तौर पर निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए करीब एक वर्ष की अवधि में निवेश की रकम दोगुनी करने का भरोसा दिलाया। इस भरोसे में आकर वादिनी और उनके रिश्तेदारों द्वारा अलग-अलग तिथियों में कुल 3 करोड़ 30 लाख रुपये निवेश किए गए। आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद न तो वादा किया गया लाभ दिया गया और न ही मूलधन वापस किया गया। प्रारंभ में मामला राजस्व पुलिस क्षेत्र सितोंस्यूं में दर्ज हुआ। बाद में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इसे नियमित पुलिस को हस्तांतरित किया गया और कोतवाली पौड़ी में अभियोग दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की गई। विवेचना में पुलिस के अनुसार सामने आया कि वर्ष 2021-22 में आरोपी सुनील दामू ने वादिनी के पति उत्तम सिंह का परिचय जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह उर्फ डॉक्टर से कराया था। उसे श्री महाकाली ग्रुप कंपनी संचालित करने वाला व्यक्ति बताते हुए निवेश पर अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत और मुलाकातें हुईं तथा अलग-अलग तिथियों में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की रकम दी गई। पुलिस का दावा है कि विवेचना के दौरान जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह द्वारा अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर एक ही आधार संख्या का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग नाम और पते वाले पहचान दस्तावेजों का प्रयोग किए जाने के साक्ष्य भी सामने आए। फर्जी दस्तावेजों के निर्माण और इस्तेमाल से संबंधित साक्ष्य मिलने के बाद मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई। पुलिस जांच में डॉ.ज्योति श्रॉफ की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। पुलिस के अनुसार आरोपी महिला को अस्पताल की संचालक एवं डॉक्टर के रूप में प्रस्तुत करते हुए लोगों से संपर्क कराया जाता था,जिससे निवेशकों के बीच विश्वास पैदा हो और वे निवेश से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए उसके संपर्क में आएं। जांच में पुलिस ने दावा किया कि ज्योति श्रॉफ अपने भाई जिगनेश श्रॉफ के साथ लगातार संपर्क में रही और अन्य आरोपियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए निवेशकों को प्रभावित करने तथा निवेश के लिए प्रेरित करने में सहयोग करती रही। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह के विरुद्ध महाराष्ट्र में भी धोखाधड़ी एवं आपराधिक मामलों के मुकदमे दर्ज हैं। वह पूर्व में जेल भी जा चुका है। वर्तमान में वह फरार बताया जा रहा है और उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है। वहीं आरोपी सुनील दामू मूले को 9 सितंबर 2024 को वारंट बी के माध्यम से आर्थर रोड सेंट्रल जेल,मुंबई से लाकर न्यायालय में पेश किया गया था। उसके विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है। इसी मामले में सह-अभियुक्त चिंतन शाह के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 18 फरवरी 2026 को तथा श्रीकांत परमार के विरुद्ध विवेचना पूर्ण होने के बाद 11 मार्च 2026 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। पुलिस के अनुसार उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में 22 जुलाई 2026 को डॉ.ज्योति श्रॉफ के विरुद्ध न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार द्वारा 1500 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी और वारंट की तामील के लिए पुलिस टीम को गुजरात रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस के सहयोग से टीम ने संभावित ठिकानों पर लगातार निगरानी और सुरागरसी की। तकनीकी विश्लेषण तथा सूचना तंत्र से मिली महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर पुलिस टीम ने आरोपी महिला को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी करते हुए आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। एसएसपी पौड़ी सर्वेश पंवार ने पुलिस अधिकारियों को धोखाधड़ी,आर्थिक अपराध और अवैध तरीके से लाभ अर्जित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी एवं कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में इस प्रकरण की विवेचना को गंभीरता से आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने अलग-अलग राज्यों तक कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। करोड़ों रुपये के कथित निवेश घोटाले में एक के बाद एक आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई और आरोप पत्र दाखिल होने से यह स्पष्ट है कि पौड़ी पुलिस आर्थिक अपराधों के मामलों में साक्ष्यों के आधार पर शिकंजा कसने में जुटी है।

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