Wednesday 26/ 08/ 2026 

Bharat Najariya
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संस्कृत शिक्षकों की समस्याओं पर गरजी आवाज,मानदेय वृद्धि से समान कार्य-समान वेतन तक उठी मजबूत मांग


श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड माध्यमिक संस्कृत शिक्षक कर्मचारी संगठन की आम बैठक मंगलवार को श्रीनगर स्थित सराफ धर्मशाला में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद सुन्द्रियाल ने की। बैठक में संस्कृत शिक्षा से जुड़े शिक्षकों एवं कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श करते हुए उनके समाधान के लिए सरकार एवं विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से मांग उठाने का निर्णय लिया गया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को मजबूत करने में वर्षों से कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं,लेकिन लंबे समय से अनेक शिक्षक अपनी विभिन्न सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को संस्कृत शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्मिकों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए। बैठक में वर्षों से कार्यरत मानदेय प्राप्त शिक्षकों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि,समान कार्य के लिए समान वेतन,तदर्थीकरण एवं समायोजन तथा अन्य सेवा संबंधी मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों को उनके अनुभव एवं कार्य के अनुरूप उचित सेवा लाभ मिलना आवश्यक है। बैठक में संस्कृत शिक्षा विनियम के क्रियान्वयन तथा संबंधित प्रक्रियाओं को शीघ्र आगे बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। संगठन ने संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की आवश्यकता बताई,ताकि विद्यालयों में पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित न हो और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण संस्कृत शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। इसके साथ ही संस्कृत विद्यालयों को वित्तीय सहायता एवं अनुदान उपलब्ध कराने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन की ओर से सरकार एवं शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर अनुदान विहीन संस्कृत विद्यालयों को अनुदान दिए जाने का आग्रह किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में विद्यालयों के संचालन और शिक्षकों-कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं,इसलिए इस दिशा में सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए। बैठक में संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि संस्कृत केवल एक विषय नहीं,बल्कि भारतीय ज्ञान,संस्कृति,परंपरा और संस्कारों की महत्वपूर्ण आधारशिला है। इसलिए संस्कृत विद्यालयों एवं उनमें कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना शिक्षा और संस्कृति दोनों के संरक्षण की दृष्टि से जरूरी है। बैठक में महामंत्री डॉ.जनार्दन केरवान,उपाध्यक्ष डॉ.नवीन पंत,जगदीश प्रसाद सकलानी,दिनेश लाल,विनायक भट्ट,सुशील नौटियाल,प्रवेश हेमदान,शशि भूषण बमोला,देवी प्रसाद,राकेश कंसवाल,डॉ.ओम प्रकाश पुरवाल,मनोज द्विवेदी,संगीता भट्ट,मुकेश प्रसाद,नवीन भट्ट,दिपेन्द्र प्रसाद डिमरी,नरेश दत्त पेटवाल सहित संगठन से जुड़े अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि संस्कृत शिक्षक-कर्मचारी अब अपनी लंबित मांगों को लेकर संगठित रूप से सरकार और विभाग के समक्ष आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार संस्कृत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय करेगी।

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