Tuesday 01/ 09/ 2026 

Bharat Najariya
राष्ट्रपति से भेंट कर अभिभूत हुए जनजातीय छात्र-छात्राएंअग्रवाल समाज महिला प्रकोष्ठ द्वारा आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व से पूर्व होटल कैलिस्ता पटेल नगरपांच भाषाओं में लोकजीवन की अमूल्य धरोहर समेटे पंचवेणी कोश संग्रह का भव्य विमोचन श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की लोकभाषा,लोक-संस्कृति और लोक साहित्य की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में रविवार को श्रीक्षेत्र श्रीनगर में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक अध्याय जुड़ा। हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद चैरिटेबल ट्रस्ट श्रीनगर के तत्वावधान में साहित्यकार डॉ.प्रकाश चमोली द्वारा रचित पंचवेणी कोश संग्रह पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। यह कृति उत्तराखंड की लोकभाषाओं में पीढ़ियों से प्रचलित मुहावरों,लोकोक्तियों एवं कहावतों को पांच भाषाओं-गढ़वाली,कुमाऊनी,संस्कृत,हिंदी और अंग्रेजी के संदर्भों के साथ प्रस्तुत करती है। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार,मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वंदे मां पुरुषोत्तम,दैणा हुय्या खोली का गणेश,दैणा हुय्या मोरी का नारायण तथा मेरा गढ़देशा जैसे गढ़वाली गीतों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। ऋषिकेश से पहुंचे कलाकारों ने पारंपरिक सांस्कृतिक वाद्ययंत्रों की मनोहारी प्रस्तुति देकर समारोह में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम का कुशल संचालन कविराज नीरज नैथानी ने किया। पुस्तक विमोचन के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के निदेशक पीबीबी सुब्रमण्यम रहे,जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य ट्रस्टी प्रो.उमा मैठाणी,अतिविशिष्ट अतिथि डॉ.विष्णुदत्त कुकरेती,कुमाऊनी साहित्यकार कृपाल सिंह शील, गढ़वाल विश्वविद्यालय लोककला एवं निष्पादन संस्कृत परिषद के निदेशक गणेश कुकशाल गणी,आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी,अनिल स्वामी,दिनेश जोशी,जसपाल गुसाईं,प्रवेश चमोली सहित अनेक साहित्यकार,शिक्षाविद् एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। पंचवेणी कोश संग्रह को केवल एक पुस्तक नहीं,बल्कि उत्तराखंड की लोकस्मृति,जनअनुभव और भाषाई विरासत को सहेजने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। लोक साहित्य की सृजनधारा सृष्टि के उद्भव के साथ ही मानव जीवन के साथ प्रवाहित होती रही है। लोकगीत,लोकगाथा,लोककथा और लोकनाट्य के साथ प्रकीर्ण लोक साहित्य में मुहावरों,पहेलियों और कहावतों का विशेष महत्व रहा है। डॉ.प्रकाश चमोली ने उत्तराखंड के आंचलिक समाज में पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रचलित अनेक दुर्लभ लोकोक्तियों,मुहावरों और कहावतों को संकलित कर उन्हें व्यापक भाषाई संदर्भ प्रदान किया है। इस कृति की विशेषता यह है कि गढ़वाली एवं कुमाऊनी लोकभाषा में प्रचलित कथनों को हिंदी,संस्कृत और अंग्रेजी में उनके समानार्थी अथवा भाव-साम्य वाले कथनों के साथ सुंदर ढंग से समायोजित किया गया है। इस दृष्टि से यह पुस्तक न केवल लोकभाषा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है,बल्कि विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद स्थापित करने वाली साहित्यिक कड़ी के रूप में भी सामने आती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य ट्रस्टी प्रो.उमा मैठाणी ने पुस्तक की विशेषताओं एवं इसके साहित्यिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। गणेश कुकशाल गणी,शिक्षक शिव सिंह नेगी,डॉ.विमल चौहान,कुमाऊनी साहित्यकार कृपाल सिंह शील तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.विष्णुदत्त कुकरेती ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए पंचवेणी कोश संग्रह को लोकभाषा और लोकसाहित्य के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कृति बताया। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने भी पुस्तक की उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए और लेखक के प्रयास की सराहना की। जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत ने डॉ.प्रकाश चमोली को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने लोकभाषा और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए ऐसे साहित्यिक प्रयासों को आवश्यक बताया। पुस्तक विमोचन समारोह में सबसे भावुक और आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला जब डॉ.प्रकाश चमोली के मूल गांव मरगांव बचणस्यू से पहुंची महिला मंगल दल की सदस्यों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। बचणस्यू मंडाण ग्रुप के अंकित रावत और जसपाल गुसाईं ने भी लेखक का सम्मान किया। कविराज नीरज नैथानी,अजब सिंह रावत,उम्मेद सिंह मेहरा,दिनेश प्रसाद डिमरी,राजकीय इंटर कॉलेज खंदूखाल के शिक्षक-कर्मचारियों तथा श्रीराम ज्वेल्स के संचालक राजीव विश्नोई ने डॉ.चमोली का स्वर्णजड़ित मुकुट,शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर तथा पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। अपने संबोधन में डॉ.प्रकाश चमोली ने अपनी पुस्तक के विमोचन के अवसर पर श्रीक्षेत्र की पुण्यभूमि को नमन करते हुए मुख्य अतिथि,विशिष्ट अतिथि,साहित्यकारों,विद्वानों और उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक के विमोचन का यह अवसर उनके लिए गौरव और भावुकता से भरा है। डॉ.चमोली ने अपने गांव मरगांव से आई महिला मंगल दल की सदस्यों को वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनकी मां पवित्रा देवी,धर्मपत्नी मीनाक्षी चमोली,पुत्र वैभव और पुत्री मंजरी,बड़े भाई राधाकृष्ण चमोली सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के निदेशक पीबीबी सुब्रमण्यम ने अपने संबोधन में भाषा और समाज के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम समाज के घटक हैं और हमारी अपनी-अपनी भाषाएं हमारी पहचान तथा सांस्कृतिक चेतना की वाहक हैं। उन्होंने लोक-भाषाओं में संरक्षित ज्ञान,अनुभव और जीवन-दर्शन को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के ऐसे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ.भानु प्रसाद नैथानी,प्रो.अनिल नौटियाल,बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमेश चन्द्र जोशी और संरक्षक अनूप पांथरी,जयकृष्ण पैन्यूली,रोटरी क्लब से दिनेश जोशी और अनूप घिल्डियाल,प्रधान मरगांव गुड्डी देवी,पूनम रतूड़ी,सावेत्री देवी वीरेंद्र रतूड़ी,प्रभाकर बाबुलकर,प्रदीप अणथ्वाल,बंटी जोशी,प्रदीप तिवारी सहित शिक्षक संगठन से जुड़े अनेक लोग एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। पंचवेणी कोश संग्रह का विमोचन श्रीनगर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरती पर लोकभाषा के संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल के रूप में सामने आया। यह कृति उत्तराखंड की लोकवाणी में संचित अनुभव,हास्य,व्यंग्य,जीवन-दर्शन और सामाजिक चेतना को शब्दों में सहेजते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान भाषाई विरासत प्रस्तुत करती है।युवा संगम चरण-7 की मेजबानी करेगा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तराखंड-बंगाल के युवाओं के बीच होगा संस्कृति और ज्ञान का महासंगमदेवप्रयाग के गांवों को मिली विकास की नई सड़क-14.82 करोड़ की लागत से 11.550 किमी डोब मोटर मार्ग के स्टेज-III का शिलान्यासराष्ट्रीय खेल दिवस पर गढ़वाल विश्वविद्यालय में खेल प्रतिभाओं का जलवा-विजेताओं को ट्रॉफी व प्रमाण-पत्र देकर किया सम्मानितश्रीनगर गिलास हाउस में गूंज रही श्रीमद्भागवत भागवत की अमृतधारा-पितरों की मोक्ष-कामना संग श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में झूमे श्रद्धालुविश्वकर्मा मार्केट के पुनर्वास की कवायद तेजमलेथा की बेटियों ने रचा इतिहास-बालिका क्रिकेट प्रतियोगिता की बनी सिरमौरबस्ता रहित दिवस पर गढ़कवि देवेंद्र उनियाल ने जगाई लोकभाषा की अलख-लोकभाषा बचेगी तभी लोकसंस्कृति बचेगी
राज्य

श्रीनगर गिलास हाउस में गूंज रही श्रीमद्भागवत भागवत की अमृतधारा-पितरों की मोक्ष-कामना संग श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में झूमे श्रद्धालु


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर गढ़वाल में इन दिनों श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतधारा से गिलास हाउस मोहल्ला भक्तिमय हो उठा है। पितरों की मोक्ष-कामना,उनकी स्मृति में श्रद्धा अर्पित करने तथा परिवार में सुख-शांति,समृद्धि एवं मंगल की कामना को लेकर पितृ भागवत कथा का आयोजन श्रद्धा और भव्यता के साथ किया जा रहा है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। गिलास हाउस मोहल्ले में 27 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक आयोजित हो रही इस पितृ भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर व्यास पीठ से भगवान की कथा का रसपान कर रहे हैं। कथा स्थल पर भक्ति गीतों,मंत्रोच्चार और भगवान के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा है। पितरों की स्मृति में भागवत कथा का आयोजन यजमान परिवार कुलदीप सिंह पंवार एवं प्रदीप सिंह पंवार द्वारा अपने पितरों की मोक्ष-कामना एवं श्रद्धापूर्वक स्मरण के उद्देश्य से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन कराया जा रहा है। यह कथा स्व.रमेश सिंह पंवार की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी मुन्नी देवी की श्रद्धा एवं संकल्प से आयोजित की जा रही है। सनातन परंपरा में पितरों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा को विशेष महत्व दिया गया है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए पंवार परिवार द्वारा आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल परिवार के लिए बल्कि क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए भी आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है। कथा के दौरान व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य रवि बहुगुणा के मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण कराया जा रहा है। आचार्य द्वारा भगवान की भक्ति,धर्म,सत्य,सदाचार,संस्कार और मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को सरल एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। कथा के प्रत्येक प्रसंग के साथ श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगते नजर आ रहे हैं। जब कथा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है और श्रद्धालु भगवान के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर देते हैं। रविवार को कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा प्रारंभ होते ही कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। नंद के आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की जैसे जयघोषों से कथा स्थल गूंज उठा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आनंद से सराबोर कर दिया। महिलाओं,बुजुर्गों और युवाओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण में उपस्थित रहे। वातावरण ऐसा बना कि मानो गिलास हाउस मोहल्ला स्वयं गोकुल की भक्ति में रंग गया हो। धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में अनेक विद्वान आचार्य एवं कलाकार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कथा आयोजन में आचार्य जितेंद्र डंगवाल,आचार्य प्रदीप बहुगुणा,आचार्य आशीष पोखरिया एवं आचार्य परमानंद नैनवाल द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों एवं व्यवस्थाओं में सहयोग किया जा रहा है। वहीं संगीत सेवा में आचार्य चंद्र प्रकाश नैथानी एवं नितिन बहुगुणा श्रद्धालुओं को भक्ति संगीत से भावविभोर कर रहे हैं। कथा के लाइव प्रसारण एवं अन्य व्यवस्थाओं में सुमित डोभाल,शुभम गैरोला एवं सूर्य प्रकाश नौटियाल भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि मनुष्य को धर्म,संस्कार,सदाचार,सेवा,भक्ति और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। विशेष रूप से पितृ भागवत के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान,परिवार की परंपराओं और सनातन संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालु भक्तों,मातृशक्ति,बुजुर्गों और युवाओं से कथा स्थल पर पहुंचकर भगवान श्रीहरि की कथा का श्रवण करने तथा इस आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया है। 27 अगस्त से प्रारंभ हुई यह पितृ भागवत कथा 2 सितंबर 2026 को विधिवत संपन्न होगी। कथा को लेकर गिलास हाउस मोहल्ले सहित श्रीनगर क्षेत्र में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है। पंवार परिवार द्वारा पितरों की स्मृति में आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा,संस्कार और सनातन परंपरा के प्रति आस्था का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आ रहा है।

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