पौड़ी के बिडोली तालाबों में पल रही ग्रामीणों की उम्मीदें-मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने खोले स्वरोजगार के नए द्वार

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ों में खाली पड़े संसाधनों को आजीविका और स्वरोजगार का माध्यम बनाने की दिशा में सरकारी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने लगी हैं। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पाबों के बिडोली क्षेत्र में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना एवं जिला योजना के तहत शुरू किया गया मत्स्य पालन इसका एक बेहतर उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां तैयार किए गए 20 तालाबों में मछली उत्पादन के माध्यम से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का नया अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ बिडोली के ग्रामीणों तक भी पहुंचा है। योजना के तहत तैयार किए गए तालाबों का संचालन प्रेरणा मत्स्य जीवी सहकारिता समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति में नौ सदस्य शामिल हैं,जो मछली पालन से लेकर उसके रखरखाव और विपणन तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बिडोली में बनाए गए 20 तालाब अब केवल जल संरचनाएं नहीं रह गए हैं,बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए आय का साधन बन रहे हैं। तालाबों में मछलियों का नियमित पालन-पोषण किया जा रहा है और तैयार होने के बाद उन्हें स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए पहुंचाया जा रहा है। समिति की ओर से स्थानीय होटलों के साथ संपर्क स्थापित करने के अलावा खिर्सू,चौबट्टा और पाबौ बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में मांग के अनुरूप मछली की आपूर्ति की जा रही है। इससे जहां क्षेत्र में उत्पादित मछली को बाजार मिल रहा है,वहीं स्थानीय उपभोक्ताओं को भी आसपास से ताजी मछली उपलब्ध हो रही है। मत्स्य पालन के प्रति ग्रामीणों की बढ़ती रुचि और बाजार में मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रेरणा मत्स्य जीवी सहकारिता समिति अब तक लगभग 70 किलोग्राम मछली की बिक्री कर चुकी है। वर्तमान में तालाबों में करीब पांच क्विंटल मछली उपलब्ध है,जिसे बाजार की मांग और मछलियों के उपयुक्त आकार के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में बाजार में मछली की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। ऐसे में मत्स्य पालन ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण जरिया बनने की संभावनाएं पैदा कर रहा है। मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि बिडोली के तालाबों में वर्तमान में फंगास,कार्प और तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा स्थानीय होटल संचालकों और आसपास के बाजारों से प्राप्त मांग के आधार पर मछली का विपणन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों को रोजगार और आय के साधन के रूप में विकसित करना है। बिडोली में समिति को तालाबों के संचालन की जिम्मेदारी दिए जाने से मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ उसके विपणन की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर विकसित हो रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर और पलायन की चुनौती के बीच मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीणों के लिए गांव में ही आय अर्जित करने का विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। बिडोली में शुरू हुई यह पहल इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि ग्रामीण पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर अपनी आमदनी के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं। समिति के नौ सदस्य तालाबों के संचालन,मछलियों की देखरेख और बिक्री व्यवस्था में जुटे हैं। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा और बाजार में मांग मजबूत होगी,वैसे-वैसे इस गतिविधि से जुड़े ग्रामीणों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। बिडोली में मत्स्य पालन की यह पहल स्थानीय संसाधन,स्थानीय उत्पादन और स्थानीय बाजार को आपस में जोड़ने का प्रयास है। तालाबों में तैयार हो रही मछली आसपास के होटल एवं बाजारों तक पहुंच रही है,जिससे उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है। मत्स्य विभाग का प्रयास है कि ऐसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक गतिविधि के रूप में नहीं,बल्कि व्यवस्थित स्वरोजगार और आय सृजन के माध्यम के रूप में विकसित किया जाए। बिडोली के 20 तालाबों से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में यदि उत्पादन,विपणन और बाजार की संभावनाओं के अनुरूप आगे बढ़ती है तो क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों को भी मत्स्य पालन से जुड़ने की प्रेरणा मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
