Wednesday 18/ 02/ 2026 

Bharat Najariya
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कलावीर देवता का दो दिवसीय (जात)-20 फरवरी को देवप्रयाग संगम तक निकलेगी ऐतिहासिक गंगा स्नान यात्रा,22 को पूर्णाहुति के साथ समापन


देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन वादियों में एक बार फिर आस्था,परंपरा और लोक-संस्कृति का अद्भुत संगम साकार होने जा रहा है। लोस्तु के पारीपंडोली स्थित प्रसिद्ध श्री कलावीर देवता मंदिर में 21 फरवरी से दो दिवसीय अनुष्ठान (जात) का शुभारंभ होगा। 22 फरवरी को पूर्णाहुति और सामूहिक आशीर्वाद के साथ इस धार्मिक आयोजन का समापन किया जाएगा। इस बार का अनुष्ठान विशेष महत्व रखता है,क्योंकि ग्रामवासियों और प्रवासी ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कपिल बर्त्वाल ने बताया कि वर्षों पुरानी आस्था के इस केंद्र को नया स्वरूप देना समूचे गांव के लिए गर्व का विषय है। इसी उपलक्ष्य में 20 फरवरी को भव्य गंगा स्नान यात्रा का आयोजन किया गया है। ब्रह्ममुहूर्त में देवयात्रा,संगम पर होगा अभिनंदन 20 फरवरी को प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में देवताओं के पश्वाओं,निशानों और पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के साथ श्रद्धालु देवप्रयाग के लिए प्रस्थान करेंगे। पवित्र संगम में गंगा स्नान के पश्चात श्रद्धालु भगवान रघुनाथ के मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। विशेष उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो.पी.वी.बी.सुब्रह्मण्यम को मंदिर समिति द्वारा औपचारिक निमंत्रण दिया गया है। प्रो.सुब्रह्मण्यम ने जानकारी दी कि संगम तट पर गंगा स्नान यात्रा का परिसर की ओर से विधिवत अभिनंदन किया जाएगा। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन-अर्चन करेंगे तथा यात्रा में सम्मिलित श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहल धार्मिक आस्था और शैक्षणिक-सांस्कृतिक समन्वय का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करेगी। शुद्धिकरण एवं प्राणप्रतिष्ठा के साथ आरंभ होगा अनुष्ठान गंगा स्नान यात्रा गांव लौटने के पश्चात मंदिर में शुद्धिकरण और प्राणप्रतिष्ठा की विधि सम्पन्न की जाएगी। 21 फरवरी को विधिवत् अनुष्ठान प्रारंभ होगा,जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालु,प्रवासीजन और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में भक्तगण सम्मिलित होंगे। कलावीर देवता क्षेत्रीय लोकआस्था के प्रमुख देवता माने जाते हैं। ग्रामीण समाज में उनके प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास है। यह अनुष्ठान केवल धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि सामाजिक एकता,सांस्कृतिक संरक्षण और परंपरा के पुनर्स्मरण का भी अवसर होता है। आस्था,संस्कृति और सामाजिक समरसता का संगम देवभूमि की परंपराओं में देवयात्राएं केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहतीं,बल्कि वे समाज को जोड़ने,नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने और सामूहिक जिम्मेदारी का बोध कराने का माध्यम भी बनती हैं। मंदिर के भव्य जीर्णोद्धार और गंगा स्नान यात्रा के माध्यम से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि जब गांव और प्रवासीजन एक सूत्र में बंधते हैं,तो आस्था के केंद्र और अधिक सशक्त और प्रेरणादायी बनते हैं। समूचा क्षेत्र इस आयोजन को लेकर उत्साह और श्रद्धा से परिपूर्ण है। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।‌आस्था की यह अलौकिक यात्रा निश्चित ही देवप्रयाग संगम से लेकर पारीपंडोली गांव तक भक्तिभाव की गूंज भर देगी।

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