26 फरवरी को श्रीनगर में विराट हिंदू महासम्मेलन-संतों के सान्निध्य में गूंजेगा सनातन संदेश,ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां तेज

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरण का केंद्र बनने जा रहा है। आगामी 26 फरवरी को श्रीनगर बाजार क्षेत्र में प्रस्तावित विराट हिंदू महासम्मेलन को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। आयोजन को लेकर धर्मप्रेमी नागरिकों में उत्साह का वातावरण है और नगर के विभिन्न हिस्सों में इसकी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सम्मेलन के संयोजक गणेश भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन को भव्य और अनुशासित रूप देने के उद्देश्य से आदिती पैलेस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई,ताकि कार्यक्रम का प्रत्येक आयाम सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। उन्होंने कहा कि गोला बाजार में आयोजित होने वाला यह महासम्मेलन हिंदू समाज की एकता,सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं को सुदृढ़ करने का एक सशक्त मंच बनेगा। गणेश भट्ट ने बताया कि सम्मेलन में देश के विभिन्न स्थानों से संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों के आगमन की संभावना है। संतों के सान्निध्य में आयोजित यह आयोजन क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा,सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर आएगा। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन,जागर,धार्मिक संगीत तथा आध्यात्मिक प्रवचनों की विशेष व्यवस्था की जा रही है। संत-महात्मा हिंदुत्व के मूल स्वरूप,भारतीय संस्कृति की गरिमा और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना पर अपने विचार रखेंगे। बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर प्रचारक मोहित सहित समिति के कोषाध्यक्ष हिमांशु अग्रवाल,देवेंद्र मणि मिश्रा,संजय गुप्ता,संरक्षक गिरीश पैन्यूली,वासुदेव कंडारी,अजब सिंह रावत,जय बल्लभ पंत,दिनेश असवाल, झाबर सिंह रावत एवं सुधीर जोशी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए और आयोजन को सफल बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मेलन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आयोजकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के संत-महात्माओं की संभावित उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्राप्त होगी। यह सम्मेलन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा,बल्कि समाज में एकता,संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को नई मजबूती भी प्रदान करेगा। सम्मेलन समिति ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं और सनातन संस्कृति के इस महापर्व का साक्षी बनें। श्रीनगर की पावन भूमि पर 26 फरवरी को आयोजित होने वाला यह विराट हिंदू महासम्मेलन निश्चित रूप से सामाजिक समरसता,आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक गौरव का नया अध्याय लिखने जा रहा है।
