शाश्वत धाम लक्ष्मोली ने किया समाज निर्माण में समर्पित 25 विभूतियों को शाश्वत रत्न सेवा से सम्मानित

श्रीनगर गढ़वाल। गढ़भूमि की पावन वादियों में स्थित शाश्वत धाम लक्ष्मोली आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना,जब समाज,शिक्षा,पर्यावरण,प्रशासन और सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 25 कर्मनिष्ठ व्यक्तित्वों को शाश्वत रत्न सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया। यह भव्य सम्मान समारोह शाश्वत धाम एवं आध्यात्मिक शोध केंद्र तथा ग्राम पंचायत लक्ष्मोली के तत्वावधान में महाशक्ति एजुकेशन सोसाइटी के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक गरिमा और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम देखने को मिला।सम्मान शाश्वत धाम के संस्थापक स्वामी अद्वेतानंद महाराज,पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ.अरविंद दरमोडा तथा ग्राम प्रधान सुरेश सिंह नेगी द्वारा प्रदान किया गया। सम्मानित विभूतियों को स्मृति चिह्न,सम्मान-पत्र,रुद्राक्ष माला एवं अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदित किया गया। शिक्षा,पर्यावरण और समाज सेवा की विभूतियां शाश्वत रत्न सेवा से सम्मानित होने वालों में शिक्षा जगत,पर्यावरण संरक्षण,प्रशासनिक सेवा और सामाजिक चेतना के अग्रदूत शामिल रहे। प्रमुख नामों में दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्राध्यापक ए.के.नागर,हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मोहन सिंह पंवार,प्राध्यापक विजय कांत पुरोहित,प्राध्यापक नरेंद्र सिंह चौहान,हिमालय बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष समीर रतूड़ी,रेल परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सुरेश बाली,शांतनु,मधुसूदन,सामाजिक कार्यकर्ता शूरवीर सिंह बिष्ट,रवि चड्ढा,राजेश अरोड़ा,वैभव नेगी,भूषण डंग,अवधेश,आचार्य ब्रह्मानंद उनियाल,विशाल राणा,दुर्गेश,कन्हैय्या,गौरा देवी कीर्तन मंडली लक्ष्मोली एवं शाश्वत सेवादल के सदस्य पूर्व प्रमुख वन संरक्षक भारतीय वन सेवा विनोद उनियाल इन सभी विभूतियों को समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जनहित में समर्पित कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वामी अद्वेतानंद महाराज ने कहा जिन्हें शाश्वत रत्न सेवा से अलंकृत किया गया है,वे समाज के जीवंत आदर्श हैं। इनके जीवन से प्रेरणा लेकर ही हम सशक्त और संस्कारित समाज की रचना कर सकते हैं। डॉ.अरविंद दरमोडा ने कहा कि सम्मान केवल उपलब्धि नहीं,बल्कि जिम्मेदारी भी है। सम्मान मिलने के साथ ही उत्तरदायित्व भी बढ़ता है। यह समाज के प्रति और अधिक समर्पण का आह्वान है। पूर्व प्रमुख वन संरक्षक विनोद उनियाल ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत है। रेल परियोजना से जुड़े सुरेश बाली के नेतृत्व में उनकी पूरी टीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि,बुद्धिजीवी एवं क्षत्रिय समाज के लोग उपस्थित रहे। समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि जब आध्यात्म,शिक्षा और सामाजिक चेतना एक मंच पर आते हैं,तो विकास की नई दिशा निर्धारित होती है। गढ़भूमि में आयोजित यह सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज को समर्पण,सेवा और संस्कार का संदेश देने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध हुआ। शाश्वत रत्न सेवा ने कर्मयोगियों के सम्मान के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि सच्ची प्रतिष्ठा वही है,जो समाज के कल्याण में निहित हो।
