Friday 20/ 02/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

सूबे में अपनाया जायेगा गुजरात का सहकारिता माॅडल–डाॅ.धन सिंह रावत


गुजरात/देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। सूबे के सहकारिता मंत्री डाॅ.धन सिंह रावत ने अपने गुजरात प्रवास के दौरान आज गांधीनगर में सहकारिता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर संस्थानों के कार्यकलापों,अन्न भंडारण व्यवस्था,बैंकिंग प्रणाली,डिजिटल विस्तार और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी ली। मीडिया को जारी बयान में डाॅ.रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए गुजरात के सफल सहकारिता मॉडल को अपनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में सहकारी संघों,बैंकों व समितियों में आधुनिक प्रबंधन प्रणाली,वैज्ञानिक अन्न भंडारण,पारदर्शी क्रेडिट व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष फोकस कर सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी जाएगी। साथ ही केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाये जायेंगे। गुजरात प्रवास के दौरान डाॅ.रावत ने आज गांधीनगर स्थित सरढव सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड के पीएम श्री अन्न भंडारण केंद्र का निरीक्षण किया। जहां उन्होंने वैज्ञानिक व सुरक्षित भंडारण व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रणाली किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे किसानों की आय वृद्धि और खाद्य सुरक्षा के लिए प्रभावी मॉडल बताया। डाॅ.रावत ने गांधीनगर जिला सहकारी संघ तथा जिला सहकारी ऋण समिति लिमिटेड का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने समिति के पारदर्शी प्रबंधन,क्रेडिट प्रणाली और वित्तीय समावेशन की योजनाओं की जानकारी अधिकारियों से ली। अपने भ्रमण के दौरान डाॅ.रावत ने जिला सहकारी संघ गांधीनगर के अध्यक्ष कोदरभाई आर पेटल से मुलाकात की और सहकारिता के विभिन्न आयामों,योजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान डाॅ.रावत ने उत्तराखंड में संचालित विभिन्न सहकारी योजनाओं का जानकारी भी साझा की। डाॅ.रावत ने कहा कि सहकारिता सामाजिक समरसता,सामूहिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। गुजरात के प्रेरणादायी अनुभवों से सीख लेकर उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को आधुनिक,पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाया जाएगा,जिससे ग्रामीण विकास,वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।

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