Sunday 06/ 09/ 2026 

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राष्ट्रीय मंच पर चमका पौड़ी का शिक्षा मॉडल,चड़ीगांव-बीरोंखाल के दो शिक्षा अधिकारियों को मिला प्रतिष्ठित सम्मान


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच शिक्षा की अलख जगाने और सीमित संसाधनों में नवाचार की नई मिसाल कायम करने वाले पौड़ी जनपद ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर किए जा रहे अभिनव प्रयासों और प्रभावी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय मंच से मिली सराहना ने पूरे जनपद को गौरवान्वित किया है। शैक्षिक प्रशासन में उल्लेखनीय कार्यों के लिए पौड़ी के दो शिक्षा अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने तथा शैक्षिक प्रशासन को अधिक प्रभावी,नवाचारी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच यह उपलब्धि उत्तराखंड के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चड़ीगांव के प्राचार्य स्वराज सिंह तोमर तथा खंड शिक्षा अधिकारी बीरोंखाल वर्षा भारद्वाज को शैक्षिक प्रशासन में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यप्रणाली के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। नई दिल्ली के अकादमिक भवन में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व एनसीईआरटी निदेशक एवं पद्मश्री से सम्मानित प्रो.जे.एस.राजपूत ने दोनों शिक्षा अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से जिला एवं विकासखंड स्तर के 84 शिक्षा अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। दो दिवसीय सम्मेलन 2 एवं 3 सितंबर को नई दिल्ली के अकादमिक भवन में आयोजित हुआ। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रशासन के क्षेत्र में विभिन्न राज्यों एवं जनपदों में किए जा रहे जमीनी नवाचारों को एक साझा मंच प्रदान करना,उनकी प्रभावशीलता को सामने लाना तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और परिणामदायी बनाने वाली कार्यप्रणालियों को प्रोत्साहित करना रहा। ऐसे राष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड के छह जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों का चयन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। विशेष रूप से पौड़ी जनपद के दो अधिकारियों का राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयन होना यह दर्शाता है कि पहाड़ी जिलों में भी शिक्षा प्रशासन के स्तर पर किए जा रहे प्रयास राष्ट्रीय मानकों पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में आज केवल पाठ्यक्रम पूरा करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता,बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर,शिक्षकों की क्षमता,विद्यालयी वातावरण,तकनीकी संसाधनों के उपयोग और समुदाय की भागीदारी को भी शिक्षा की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। इसी दृष्टि से पौड़ी जनपद में विद्यालयी शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। शिक्षा प्रशासन में नवाचार,शिक्षक क्षमता संवर्धन,तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और सामुदायिक सहभागिता जैसे पहलुओं को प्राथमिकता देकर विद्यालयों में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल जैसे पर्वतीय जनपद में शिक्षा व्यवस्था का संचालन अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में विद्यालयों तक पहुंच,विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति,संसाधनों की उपलब्धता,शिक्षकों की तैनाती तथा अभिभावकों एवं समुदाय की सहभागिता जैसी अनेक चुनौतियां शिक्षा प्रशासन के सामने रहती हैं। ऐसे वातावरण में यदि प्रशासनिक स्तर पर नवाचार और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए जाते हैं,तो उसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलता है। पौड़ी के दोनों अधिकारियों को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन्हीं प्रयासों की प्रभावशीलता की ओर संकेत करता है। पौड़ी के लिए गौरव का क्षण जनपद के दो शिक्षा अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने से शिक्षा जगत में भी उत्साह का माहौल है। यह उपलब्धि न केवल संबंधित अधिकारियों के कार्यों का सम्मान है,बल्कि उन शिक्षकों,प्रधानाचार्यों,विद्यार्थियों और अभिभावकों के प्रयासों की भी पहचान है,जो विद्यालयी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय मंच पर पौड़ी के अधिकारियों को मिला यह सम्मान अन्य शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों को भी नई ऊर्जा देगा तथा उन्हें स्थानीय स्तर पर नवाचार आधारित कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि से पौड़ी जनपद की शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदें भी जगी हैं। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय स्तर पर सफल नवाचारों को अन्य विद्यालयों एवं विकासखंडों तक पहुंचाया जाए,ताकि उनका व्यापक लाभ विद्यार्थियों को मिल सके। पौड़ी के इन दो अधिकारियों की उपलब्धि यह संदेश देती है कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां शिक्षा में उत्कृष्टता की राह में बाधा अवश्य हैं,लेकिन नवाचार,बेहतर प्रशासनिक सोच और समर्पित प्रयासों से इन्हीं परिस्थितियों में बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है। राष्ट्रीय मंच पर मिली यह उपलब्धि निश्चित रूप से पौड़ी गढ़वाल और समूचे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है।

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